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ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय

Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)

DevanagariSanskritpublished592 pages

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दूसरा अध्याय ११—देवों ने यज्ञ फैलाया। वह जब यज्ञ पूर रहे थे उस समय असुरों ने आक्रमण किया कि हम यज्ञ को रोक दें। उन्होंने पूर्व की ओर से यूप पर आक्रमण किया जब आप्रि मंत्र पढ़े जा चुके थे और अग्नि पशु के चारों ओर नहीं ली जाई गई थी। देव जग पड़े और अपनी तथा यज्ञ की रक्षा के निमित्त अग्नि रूपी तीन दीवारें चारों ओर बना दीं। असुरों ने इन दीवारों को जलता हुआ और चमकता हुआ देखकर आक्रमण न किया। वे भाग गये। देवों ने असुरों को पूर्व में भी हरा दिया और पश्चिम में भी। इसीलिये यजमान लोग अग्नि को पशु के चारों ओर ले जाते हैं और मन्त्र पढ़ते हैं। क्योंकि वह जलती हुई आग के रूप में तीन दीवारें बना देते हैं, अपनी रक्षा के लिए और यज्ञ की रक्षा के लिये। जब पशु को आप्रि मंत्र पढ़कर पवित्र कर लिया और अग्नि को चारों ओर फिरा लिया तो वह उसे उत्तर की ओर ले जाते हैं। उसके आगे आगे जलती हुई लकड़ी ले जाते हैं मानो पशु ( १११ )