BharatKosha
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय

Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)

DevanagariSanskritpublished592 pages

Page 271 of 592

Read in context
Page 271

तीसरा अध्याय ] २५७ महीनों के सत्रों द्वारा यह अपने अंगों से पापों को दूर करता है। साल भर में विषुवान् शस्त्र के द्वारा वह अपने सिर से पाप दूर कर देता है। जो इस रहस्य को समझता है वह विष- वान् शस्त्र के द्वारा पापों से छूट ही जाता है। महाव्रत दिन को विश्वकर्मा के लिये एक बैल (वृषभ) का आलंभन करे। यह दोनों ओर दो रंगों का होना चाहिये। इन्द्र वृत्र को मार कर विश्वकर्मा हो गया। प्रजापति प्रजाओं को रच कर विश्वकर्मा हो गया। संवत्सर विश्वकर्मा है। इस प्रकार वे इन्द्र, अपने आत्मा, प्रजापति, संवत्सर और विश्वकर्मा को प्राप्त होते हैं। और इन्द्र में, अपने आत्मा में, प्रजापति में, संवत्सर में और विश्वकर्मा में प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं। जो इस रहस्य को समझता है उसकी प्रतिष्ठा होती है। (२२) ऐतरेय ब्राह्मण की चौथी पञ्चिका का तीसरा अध्याय समाप्त हुआ। १७