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ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय

Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)

DevanagariSanskritpublished592 pages

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दूसरा अध्याय ४—देवों ने यज्ञ ताना। जब यज्ञ की तैयारी कर रहे थे तब असुर आये कि इस में विघ्न डालें। उन्होंने उनके ऊपर दक्षिण की ओर से आक्रमण किया। उसको सबसे कमज़ोर समझकर। देव जग पड़े और अपने में से दो अर्थात् मित्रावरुण को दक्षिण की ओर नियत कर दिया। इन दो मित्र-वरुण के द्वारा उन्होंने दक्षिण से प्रातः सवन में असुरों को हटा दिया। ऐसे ही यजमान भी मित्रावरुण के द्वारा दक्षिण से प्रातः सवन में असुरों को भगा देते हैं। इसलिये मैत्रावरुण ऋत्विज् प्रातः सवन में मैत्रावरुण शस्त्र पढ़ता है। असुरों ने दक्षिण की ओर हार कर यज्ञ के मध्य भाग में आक्रमण किया। देवों ने सजग होकर मध्य में इन्द्र को नियत किया। उन्होंने इन्द्र के द्वारा मध्य में प्रातः सवन में असुरों को भगा दिया, इसी प्रकार यजमान भी इन्द्र के द्वारा मध्य से ( ६२ )