ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय
Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)
DevanagariSanskritpublished592 pages
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२८ [ प्रथम पञ्चिका है। इसीलिये जब कोई मनुष्य कुछ कहता है तो लोग कहते हैं “क्या तूने देखा है ?” यदि वह कहता है “मैंने देखा है” तो वे उस पर श्रद्धा करते हैं। यदि मनुष्य स्वयं किसी चीज को देख सकता है तो दूसरों पर श्रद्धा नहीं करता, चाहे कई हों। इसलिये विचक्षणवती वाणी को बोले। तब उसकी वाणी सचमुच ही सत्य वाली हो जाती है। (६) ऐतरेय ब्राह्मण की पहली पञ्चिका का पहला अध्याय समाप्त