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ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय

Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)

DevanagariSanskritpublished592 pages

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पहला अध्याय १—अब पशु के बाँट का विषय है। उसके विभाग कहेंगे। दोनों जबड़े और जीभ प्रस्तोता के लिये। गरुड़ रूपी छाती उद्गाता के लिये। कण्ठ और तालु प्रति हर्ता के लिये। दाहिना नितम्ब होता के लिये। बांया ब्रह्मा के लिये। दाहिनी जाँघ मैत्रा- वरुण की। बाईं ब्राह्मणाच्छंसी की। दाहिनी बगल कन्धे सहित अध्वर्यु की। बाईं उपगाताओं की (जो सामगान करने वालों के साथ पढ़ते हैं), बाँया कन्धा प्रतिप्रस्थाता के लिये, दाहिने बाजू का नीचे का भाग नेष्टा को, बाँया पोता को, दाहिनी जाँघ अच्छावाक को, बाईं आग्नीध्र को। दाहिने बाजू का ऊपरी भाग अत्रेयि को, बाँया सदस्य को, रीढ़ की हड्डी और मूत्राशय की नलिका गृहपति को, दाहिने पैर भोज देने वाले गृहपति को, बायें पैर भोज देने वाले गृहपति की स्त्री को। ऊपर का होंठ इन दोनों का शामिल है। इसको गृहपति ही बाँटेगा। पूँछ को पत्नियों के लिये ले जाते हैं। लेकिन उनको ( ४११ )