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ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय

Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)

DevanagariSanskritpublished592 pages

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ऐतरेय में प्रयुक्त कुछ पारिभाषिक शब्द और व्युत्पत्तियाँ आग्नीध्र—अग्नि रखने का स्थान। अग्नि कुण्ड। अतिजगती—१३-१३-१३-१३ के क्रम से ५२ अक्षरों का छन्द। अध्रिगु—वह व्यक्ति जो पशु को शान्त (चुप) करता है (२।७)। अनद्धा—जो देव, पितर, या मनुष्यों में से किसी को आहुति न दे (७।६)। अनीजान—वह व्यक्ति जिसने यज्ञ अभी नहीं किया। अनुचर—शस्त्र का पिछला भाग। अनुमति—अमावस्या का उत्तरार्ध। अनुष्टुभ्—८-८-८-८ अक्षरों से बने ३२ अक्षर का छन्द। अनुस्तरणी—वह गौ जो मृत यजमान को चिता पर रखने के बाद दान दी जाय (३।३२)। अन्तर्याम—देखो उपांशु। अभ्यावर्त्ति—बारबार आने वाले षडह आदि दिन। अवभृथ—यज्ञ की अन्तिम क्रिया (७।१७)। अविह्रुतपाठ—जिसमें एक मंत्र के पद दूसरे मंत्र के पद से न मिलें। अव्यूह—छन्दों के क्रम टूट जाने को कहते हैं, जैसे प्रातरनुवाक में ( गा-श्र-त्रि-बृ-उ-ज-पं ) ( ४९५ )