ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय
Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)
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Read in contextमंत्रसूची [ ऐतरेय ब्राह्मण में अधिकांश मन्त्र ऋग्वेद के हैं, पर कुछ मन्त्र अन्य वेदों के भी। इस सूची में यदि किसी वेद का निर्देश नहीं है, तो समझना चाहिए कि मन्त्र ऋग्वेद का है ; शेष स्थलों के लिए अ० = अथर्ववेद, सा० = सामवेद, य० = यजुर्वेद ; आश्व० = आश्वलायन गृह्य सूत्र। मन्त्रों की प्रतीक के आगे कोष्ठक में ऋग्वेद का मण्डल, फिर सूक्त और फिर मन्त्र दिया गया है। अन्य वेदों के संबंध में भी इसी क्रम से काण्ड या अध्याय, सूक्त और मन्त्र दिए हैं। कोष्ठक के बाद इस हिन्दी अनुवाद ग्रन्थ की पृष्ठ संख्या दी गई है। पृष्ठ संख्या के बाद फिर जो कोष्ठक है, उसमें ब्राह्मण की पञ्चिका और सूक्त का निर्देश है। कुछ प्रतीकें मन्त्र की निर्देशक ही नहीं, प्रत्युत उस मन्त्र से आरम्भ होने वाले समस्त सूक्त की निर्देशक हैं। इन प्रतीकों के पूर्व तारक चिह्न (*) लगा है। तीन चार मन्त्रों (त्रिक्) को सूचित करने वाली प्रतीकों के पहले (ϕ) चिह्न है। —सत्य प्रकाश ] अक्रं ददग्निस्तन० ( १०।४५।४) ४१८ ( ७।६ ) अद्यानद्नो न० ( १०।५३।७ ) ४२३ ( ७।६ ) *अगन्म महा० ( ७।१२ ) ३२६ ( ५।२० ) अग्न आ याहि० ( सा० १।१ या ६।१६।१० ) १६, ४१७ ( ७।६ ) अग्न इन्द्रश्च ( ३।२५।४ ) १५० ( २।३७ ) ( ५०६ )