ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय
Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)
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Read in context६४ [ प्रथम पञ्चिका नाके सुपर्णमुपपत्तिवांसं गिरो वेनानामकृपन्त पूर्वाः। शिशुं रिहन्ति मतयः पनिप्रतं हिरण्ययं शकुनं द्यामणि स्थाम्॥ (ऋ० ९।८५।११) नीचे के दो मन्त्रों से पूर्वाह्न आहुतियां देता है :- (१) तप्तो वां घर्मो नक्षतु स्व होता प्र वामध्वर्युश्चरतु पयस्वान्। मधोर्दुग्धस्याश्विना तनाया वीतं पातं पयस उस्रियायाः॥ (अथर्व० ७।७३।५) (२) उभा पिबतमश्विनोभा नः शर्म यच्छतम्। अविद्रियाभिरू- तिभिः॥ (ऋ० १।४६।१५) 'अग्नेवीहि' (अग्नि खाओ) इस कृत्य के पश्चात् स्विष्ट- कृत के स्थान में वषट्कार होता है। नीचे के दो मन्त्रों से अपराह्न की आहुतियां देता है :- (१) यदुस्रियास्वाहुतं घृतं पयो यं स वामश्विना भाग आ गतम्। माध्वी धर्तारा विदथस्य सत्पती ततं घर्मं पिबतं रोचने दिवः॥ (अथर्व० ७।७३।४) (२) अस्य पिबत मश्विना युवं मदस्य चारुणः। मध्वो रातस्य धिष्ण्या॥ (ऋ० ८।३५।१४) अब 'अग्नेवीहि' कृत्य और तत्पश्चात् स्विष्टकृत के स्थान में वषट्कार होता है। स्विष्टकृत के लिये हवि में से तीन भाग काटते हैं। अर्थात् सोम के, घर्म के (जो प्रवर्ग्य पात्र में हैं) और 'वाजिन' अर्थात् गर्म मट्ठे के। जब होता इस प्रकार वषट् बोलता है तो स्विष्ट- कृत की कमी पूरी हो जाती है। अब ब्रह्मा इस मन्त्र को जपता है :- विश्वा आशा दक्षिणसद् विश्वान्देवान्यालिह। स्वाहा कृतस्य घर्मस्यमध्वः पिबतमश्विते॥ (आश्व० ४।७) आहुतियों के देने के पश्चात् होता नीचे लिखे सात मंत्रों को पढ़ता है :-