अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)
by पारम्परिक लोक संग्रह
Source: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (origin)
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रक्षा की होगी यहाँ तो समस्त भारत को काल की गाल से बचाना है। आप धैर्य से काम लें, कामयाबी आपके ही द्वारा हासिल होगी। इस महान पुण्य का भागी होना विधाता ने आपही के करम में लिखा है।" बीरबल गंगको प्रोत्साहित करने के लिये फिर बोला— हमारे कवि सम्राट तो सदासे सूरमा हैं; इस बार न जाने क्यों इनका मन कदरा रहा है? क्या राज का प्रबन्ध उलटने वाला तो नहीं है? हरेच्छा! भावी बड़ी प्रबल होती है।" गंग से चुप न रहा गया वे बोले-“दीवान साहब अब कुछ न कहो आपके बोलने से मेरा कलेजा फड़कने लगता है। आपने कोई जादूगरी तो नहीं सीख रक्खी है। या आपकी बाणीमें कोई मोहनी शक्ति तो नहीं घुसी हुई है। मैं आपकी बातें सुनते ही आप के फेर में आ जाता हूँ। टोडरमल ने कहा-“देखो गंग मोहनी सोहनी कहना तो टाल मटोल की बातें हैं अब आपको अपना विचार स्पष्ट कर देना चाहिये या तो हाँ करो वा नाहीं करके सारा बखेड़ा दूर कर दो। गंग बोले-“क्या खूब, आप सब लोग एक मत होकर मेरे पीछे पड़ गये हैं, परन्तु स्मरण रखना कि इस बार प्राण लेने देने की बारी है, जब सर कटाने की दशा उपस्थित होगी तो क्या उस समय भी मेरी रक्षा करोगे।” बीरबल ने सबको इशारा किया जिस कारण सब सभासद एक साथ हामी भरने को तय्यार हो गये। बीरबल बोला-“कविवर! आपका एहसान इस सभासदों पर सबसे बढ़ कर होगा। क्या इतने लोगों के कहने पर बादशाह विचार नहीं करेंगे। टोडरमल ने कहा-“गंगजी अब