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अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

by पारम्परिक लोक संग्रह

Source: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (origin)

DevanagariHindipublished292 pages

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८५ अकबर बीरबल विनोद इसी लिये कहा गया है कि अच्छी संगत से अच्छी और बुरी संगत से बुरी बुद्धि उत्पन्न होती है। बीरबल गाय राँधत ऐसा देखाजाता है कि बादशाह को हँसी मजाक से बड़ा प्रेम था, इसी कारण बात बात में उससे और बीरबल से हँसी हो जाया करती थी। हँसी हँसी में अक्सर बादशाह क्रुद्ध भी हो जाता, परन्तु बीरबल कभी क्रोधित नहीं होता था। इस बात को मनमें विचार कर बादशाहने बीरबल को क्रोधित करने की एक नई युक्ति निकाली। वह बोला-“बीरबल गाय राधत” तब उत्तर में बीरबल ने कहा-“बादशाह शूकर राँधत।” बीर- बल तो बादशाह के मुख से उपरोक्त पहेली के निकलते ही उसका अर्थ समझ कर क्रोधित न हुआ, परन्तु बादशाह क्रोधित हो गया और बीरबल से बोला-“तुम मुझे मजाक के बहाने शूकर खिलाते हो।” तब बीरबल बोला-“आप भी तो मुझको गाय खिलाते हैं।” बादशाह अपने काफिये का अर्थ बदल कर बोला-“मैं तो तुम्हें राधते वक्त गाने को कहा था।” बीरबल ने उत्तर दिया- “गरीबपरवर! भला मैं शूकर राधने को कब कहा था। मैं तो कह रहा था कि बादशाह शूकर रखाय। याने आप (शुक) तोते की रखवाली करते हैं।” आप बिना अर्थ समझे अकारण क्रोधित होते हैं।” बादशाह निरुत्तर हो गया। ─०:***०─

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