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अनुरागसागर वाणी

अनुरागसागर वाणी

Anuragsagar Vani

by स्वामी मधु परमहंस जी

Source: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (origin)

Devanagarihipublished144 pages

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अनुरागसागर वाणी

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अनुरागसागर वाणी

विषय सूचीपृष्ठ संख्या
सतगुरु वंदना7
शब्द के प्रेमी8
अंत समय का मीत11
मृतक होय सो साधु12
गुरु कृपा से साधु कहावै18
सृष्टि उत्पत्ति से पहले का रहस्य21
सोलह सुत की उत्पत्ति25
काल निरंजन कीनहीं तपस्या27
निरंजन का पुनः तप32
त्रिदेव की उत्पत्ति41
निरंजन मन बनकर गुप्त हुआ43
त्रिदेवों ने किया समुद्र मंथन44
ब्रह्मा को दिया वेद ने रहस्य48
ब्रह्मा गये आकाश में52
नहीं पहुँच पाए विष्णु53
ब्रह्मा को लेकर आद्य शक्ति व्याकुल हुई55
ब्रह्मा को लाने चली गायत्री57
शाप से ग्रसित हुए सब65
विष्णु को हुए पिता के दर्शन69
धर्मदास का संशय70
विष्णु बने ठाकुर72
चौरासी लाख योनियाँ बनीं74
चार खानि के तत्व भेद75
ज्ञान विभिन्नता का कारण77
विभिन्न योनियों से मानव तन में आए हुएओं की पहचान78