बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
by महर्षि बौधायन
Source: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (origin)
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Read in context९४ बौधायन-धर्मसूत्रम् [ अभक्ष्याः
अनु०— ग्राम्य (पालतू) पशु अभक्ष्य होते हैं ॥ १ ॥
सप्त ग्राम्याः पशवः गोश्वाजाविकं पुरुषश्च गर्दभश्च उष्ट्रस्सप्तमोऽश्वमुष्ट्रैके ब्रुवते ॥ १ ॥
क्रव्यादारशकुनयश्च ॥ २ ॥
अनु०— मांसभक्षी पशु ओर (पालतू) पक्षी अभक्ष्य होते हैं ॥ २ ॥
टि०— क्रव्यादाः = मांसभक्षी का संबन्ध 'शकुनयः' के साथ भी लिया जा सकता है। सूत्र में 'च' के प्रयोग के आधार पर गोविन्द स्वामी 'शकुनयः' के साथ भी 'ग्राम्याः' पद को ग्रहण करते हैं। इस प्रकार यहाँ पालतू पक्षियों से तात्पर्य है।
क्रव्यं मांसं तददन्तीति क्रव्यादाः। शकुनयः काकाः शकुन्ता वा ग्राम्यानुकर्षणार्थश्चकारः। एतेषां भक्ष्यत्वेन कामतः प्राप्तानां प्रतिषेधः। तथा च श्रुतिः—'स होवाच किं मेऽन्नं भविष्यतीति' इति मुख्यप्राणेन पृष्टे ऊचुः 'यत्किञ्चिदिदमाश्वभ्य आशकुनिभ्य इति होचुः' इति आह च मनुः—
प्राणस्याऽन्नमिदं सर्वं प्रजापतिरकल्पयत् ॥ इति ॥
अतस्सर्वमिदं भक्ष्यत्वेन प्राप्तं तन्निवारणार्थे प्रकरणारम्भः ॥ २ ॥
तथा कुक्कुटसूकरम् ॥ ३ ॥
अनु०— इसी प्रकार (ग्राम्य) कुक्कुट और सूकर का मांस अभक्ष्य होता है ॥ ३ ॥
टि०— यहाँ 'तथा' से 'ग्राम्याः' पद की अनुवृत्ति समझी जायगी। पक्षियों के विषय में गौतम ध० सू० में अलग-अलग उल्लेख किया गया है: 'काककङ्कगृध्रश्येनार जलजा रक्तपादतुण्डा ग्राम्यकुक्कुटसूकराः' २. ८. २९. मेरे अनुवाद सहित चौखम्बा संस्करण, पृ० १८६।
तथाशब्दोऽपि ग्राम्यानुकरणार्थ एव । कुक्कुटसूकरमिति द्वन्द्वैकवद्भावः ॥ ३ ॥
साम्प्रतं ग्राम्यपशुविषयप्रतिषेधापवादमाह—
अन्यत्रा¹ जाविकेभ्यः ॥ ४ ॥
अनु०— बकरा और भेड़ को छोड़कर अन्य ग्राम्य पशुओं के भक्षण के विषय में ही निषेध समझना चाहिए ॥ ४ ॥
प्रत्येकं बहुवचनं जात्याख्यायामन्यतरस्यां भवति। अजाविकौ भक्ष्यौ ॥
१. अन्यत्राऽजाविभ्यः इति क. पु. अन्यत्राऽजेभ्यः इति ख. पु.