बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
by सद्गुरु मधु परमहंस जी
Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
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Read in context110 साहिब बन्दगी
(48) साहिब जी को योद्धा द्वारा लट्ठों से मरवाया जाना
बार–बार लज्जित हो रहे धर्म गुरु शेख तकी को मौलवियों, मुल्लाओं और पंडितों ने सलाह दी कि कबीर को किसी योद्धा द्वारा लट्ठों से मरवा देते हैं। हो सकता है कि वो कबीर का अंत कर दे। बौखलाया हुआ तकी यह भी आजमाने को तैयार हो गया। उसने सैनिकों को एक ताकतवर योद्धा को खोज लाने का हुक्म दिया। सैनिक योद्धा की खोज में चल पड़े और एक ताकतवर योद्धा को खोज लाए, जो लट्ठ चलाने में बड़ा ही माहिर था। तकी ने योद्धा से कहा कि तुम अपने लट्ठ से कबीर को मार दोगे तो तुम्हें मुँह माँगा ईनाम दिया जायेगा। योद्धा ने स्वीकार कर लिया। तकी ने कहा मेरे इशारे का इन्तजार करना।
आम तौर पर तकी तब आदेश देता जब साहिब श्रद्धालुओं के बीच बैठे होते थे, उन्हें प्रवचन दे रहे होते थे। ऐसा वो इसलिए करता ताकि साहिब को सबके सामने मार सके। जब साहिब सत्संग कर रहे थे तब शेख तकी का इशारा पाते ही योद्धा ने साहिब पर अंधाधुंध प्रहार करने शुरू कर दिये पर साहिब पर उन लट्ठों का कोई भी असर न हुआ। लट्ठ तो फूलों की तरह साहिब पर लग रहे थे। योद्धा भी साहिब पर अपने लट्ठों का कोई असर न देख बड़ा दुखी हुआ। आख़िर जब लट्ठ उल्टा उसके ऊपर बरसा और उसे खून निकलने लगा तो वह हार मानकर निराश होकर वहाँ से भाग गया। तकी को इस बात से अथाह लज्जित होकर जाना पढ़ा।
लट्ठधारी ताकतवर योद्धा, तकी पास ले आये।
सत्संग करते साहिब पर, पहिलवान लट्ठ चलाये॥
लट्ठ साहिब को छू न पाये, पलट योद्धा सिर लागा।
खून से लथ-पथ हुआ पहलवान, हार मान कर भागा॥