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बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

by सद्गुरु मधु परमहंस जी

Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

Devanagarihipublished122 pages

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112 साहिब बन्दगी

#(49) साहिब जी को कोड़ों से मरवाया जाना

शेख तकी साहिब को जल्दी से जल्दी मिटाना चाहता था। उसकी कोई भी तरकीब कामयाब नहीं हो रही थी। वो सोचता था कबीर कोई जादूगर है। उसने पंडित ओर मुल्ला की सलाह पर साहिब को कोड़ों से मरवाने का फैसला कर लिया। बौखलाया हुआ शेख तकी साहिब को रास्ते से हटाने के लिए हर किसी की बात मान लेता था। इसलिए उसने कोड़ों वाली बात भी मान ली और अपने सिपाहियों को हुक्म दिया कि किसी ऐसे आदमी को खोजकर लाओ जो कोड़े चलाने में कुशल हो। जब ऐसा व्यक्ति खोजकर लाया गया तो शेख तकी ने उसे समझा दिया कि उसे क्या करना है। जब साहिब भक्तजनों को प्रवचन सुना रहे थे, तब शेख तकी के इशारे पर उसने साहिब पर कोड़ों की वर्षा कर दी। पर कोड़ों से साहिब की शब्द स्वरूपी देही पर कोई असर नहीं हो रहा था और न ही कोई निशान पढ़ रहा था। साहिब तो भक्तजनों को सत्य भक्ति का उपदेश देने में मगन थे। कोड़ों का असर न होते हुये देख कोड़े चलाने वाला बड़ा परेशान हो गया और आखिरकार थक कर वहाँ से भाग खड़ा हुआ। यह देख भक्तजन साहिब की जय-जयकार करने लगे। शेख तकी और उनके सभी साथी लज्जित होकर वहाँ खड़े होकर साहिब की ओर देखते रह गए।

हुआ फैसला साहिब को, कोड़ों से मार मुकाने का। धर्म गुरु ने हुकम दिया, सत्संग में कोड़े लगाने का॥ वर्षा की तरह कोड़े बरसे, कोड़े वाला गया थक हार। सब का सिर नीवा हुआ, साहिब की सुन जय-जयकार॥