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बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

by सद्गुरु मधु परमहंस जी

Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

Devanagarihipublished122 pages

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118 साहिब बन्दगी

#(52) मृतक कमाली को कब्र से जिन्दा करने को कहा गया

सत्य के पुंज सर्वव्यापी सतगुरु कबीर साहिब को धर्म गुरु शेख तकी बार-बार कसनियां लेकर भी साहिब का कुछ नहीं बिगाड़ सका था। उसको कुछ-कुछ समझ में आ गया था कि साहिब कोई साधारण नहीं हैं, ईलाही व्यक्तित्व हैं। पर फिर भी वह हार नहीं मान रहा था। राजदरबार लगा था, साहिब प्रवचन कर रहे थे। तकी वहाँ पर आया। राजा और सभी लोग धर्मगुरु के सम्मान में उठ खड़े हुये पर साहिब अपने आसन पर ही विराजमान रहे। यह देख तकी अधिक क्रोधित हुआ और राजा से कहा कि आप तो इस कबीर को खुदा का रूप मानते हैं। यदि यह सच में खुदा का रूप है तो मेरी बेटी, जो 8 दिन पहले मर गई थी, कब्र से जिंदा करके दिखाए। तब मैं समझूँगा कि यह सच में खुदा का रूप है। बादशाह ने साहिब की ओर देखा और साहिब से मन-ही-मन प्रार्थना की। साहिब ने राजा की बात मान ली और सबके साथ बेटी की कब्र पर पहुँचे। अब साहिब ने कहा-उठ शेख तकी की बेटी! पर वो नहीं उठी। साहिब ने फिर कहा-उठ तकी की बेटी! पर वो फिर भी नहीं उठी। तब साहिब ने कहा-उठ कबीर की बेटी! साहिब जी ने इतना ही कहा कि कब्र फट गई और लड़की उसी समय कब्र में से उठकर खड़ी हो गयी और साहिब के चरणों में लिपट गयी। सब साहिब की जय-जयकार करने लगे। अचनचेत राजा के मुँह से निकला-हे साहिब! आपने तो पुनः कमाल कर दिया। राजा के मुख से ये शब्द सुन साहिब ने उस कन्या का नाम भी कमाल की तरह ‘कमाली’ ही रखा।

मुर्दा लाश जीवित हुई, जब साहिब शब्द उचारा।
देख कमाल दंग रहे सब, साहिबा नाम कमाली पुकारा॥

धर्म गुरु अपनी बेटी से कहने लगा कि अब घर चलो। कन्या ने शेख तकी के साथ जाने से मना कर दिया और कहा जब साहिब जी ने कहा उठ शेख तकी की बेटी मैं नहीं उठी। जब साहिब ने माता का नाम लेकर कहा, उठ तकी की बेटी मैं तब भी नहीं उठी। जब साहिब जी ने कहा उठ कबीर की बेटी तो मैं कबर से बाहर आ गई। अब मैं कबीर साहिब की बेटी हूँ। आपने तो मुझे गाड़ दिया था, पर साहिब ने ही मुझे जीवन दान दिया। फिर लड़की ने सबको उपदेश दिया कि कबीर साहिब स्वयं ही खुदा हैं। ये तो जीवों को संसार-सागर से पार लगाने के लिए आए हैं। पिता की ओर देखकर वो बोली कि आप अपनी ईर्ष्या को छोड़ दो और साहिब की शरण ग्रहण करो। इसी में आपकी भलाई है। अपनी बेटी के मुख से ये शब्द सुन तकी का सारा अज्ञान जाता रहा और वो साहिब के चरणों में लिपट गया।