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बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

by सद्गुरु मधु परमहंस जी

Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

Devanagarihipublished122 pages

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14 साहिब बन्दगी

अठयें शुकदेव पहँ ज्ञान पसारा। सकल सरब भेद निरवारा॥
नवमें राजा विदुर समझाया। भक्तिरूप उन दर्शन पाया॥
दशमें राजा भोज बुझाया। सत्य शब्द पुनि उसे चिह्नाया॥
ग्यारहें राजा मुचकुन्दहि तारे। बारहें राजा चन्द्रहास उबारे॥
तेरहे चलि वृन्दावन आये। चारि गवाल गोपी समझाये॥
गुरु रूप पुनि पन्थ चलाये। भौंसे हंसा आनि छुड़ाये॥
बावन लाख जो जीव उबारा। कलियुग चौथे यहाँ पर धारा॥

इस तरह साहिब कह रहे हैं कि 17 जीव मैंने द्वापर में तारे। अब कलयुग का वर्णन करते हुए कह रहे हैं-

कलयुग-कलयुग में ज्ञानी पुरुष कबीर नाम से आए और गोरखदत्त (गोरखनाथ), गुरु रामानन्द, पीर शेख तकी, राजा सिकन्दर, राजा बीर सिंह, कनक सिंह, राव भुपाले, रतना बनिया, अलिदास धोबी, ...................., हजरत मुहम्मद, नानक देव जी, साहु दमोदर को तारा और गुरु स्वरुप परवाना दिया। ऐसे 5 लाख पहिले तारे 42 लाख और जीवों को उबारा।

प्रथमं गोरखदत्त समझाये। तारक भेद हम तुमहिं बताये॥
दुसरे शाह बलख को बोधा। पढ़े आरबी बहुविधि सोधा॥
तिसरे रामानन्द पहँ आये। गुप्त भेद हम उन्हें सुनाये॥
चौथे पीर को परचे दीन्हा। पचये शरण सिकन्दर लीन्हा॥
छठै बीरसिंह राजा भयऊ। ताको हम शब्द सुनयऊ॥
सतयें कनकसिंघ समझाये। सोलह रानी लोक पठाये॥
अठएँ राव भूपाले आये। ग्यारह रानी लोक पठाये॥
नौमें रतना बनिन समझाई। जाति अग्रवालिन करत मिठाई॥
दशाएँ अलिदास धोबी गयऊ। सात जीव परवाना पयऊ॥
ग्यारहें ________ समझायी। तिन बहु भक्ति करी चितलायी॥
बारहें मुहम्मद कह्यो कुराना। हद्द हुकुम जीव कर माना॥