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बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

by सद्गुरु मधु परमहंस जी

Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

Devanagarihipublished122 pages

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जो वस्तु मेरे पास है, ब्रह्माण्ड में कहीं नहीं है।

समझो यह मेरा अहंकार नहीं, मैं बढ़ाईवश भी नहीं कहता। आप सच मानना, अभी बार-बार चेताकर कह रहा हूँ, जब यहाँ से चला जाऊँगा तो दुनिया पछताएगी, क्योंकि सत्य है—मैं जिस वस्तु की बात कर रहा हूँ, वो भी इस संसार की नहीं है, तीन लोक में कहीं नहीं है। वो चौथे लोक की वस्तु है।

सार शब्द सो कहा न जाई। लिखा न जाई, पढ़ा न जाई॥
कहैं कबीर सुनो भाई साधो। बिन सतगुरु कोई नाहीं पाई॥

जब वो वस्तु मिलती है तो तीन चीजें आ जाती हैं। मैंने अपनी इस चीज़ का अनुभव एक-दो पर नहीं, बल्कि लाखों लोगों पर किया है। इसलिए इसमें कोई संशय नहीं है, पक्की बात है। तीन चीजें शर्तिया होती हैं। जिसे भी मैं नाम देता हूँ, तीन चीजें पक्का हो जाती हैं—

  1. आत्मा और मन अलग हो जाते हैं। 2. संसार का आकर्षण समाप्त हो जाता है। 3. एक पूर्ण सुरक्षा मिल जाती है।

नतीजा सामने है। मेरा हर नामी नाम पाकर बदल जाता है। केवल ‘नाम’ की ताकत से आत्मा कालपुरुष (निराकार मन) के चंगुल से छूटकर अपने सही घर जा सकती है। पर, यह नाम दुनिया में प्रचलित नामों से परे है। सद्गुरु द्वारा यह नाम देना कोई शब्द बताना नहीं है, आत्मा को चेतन करना है। आत्मा को उसकी शक्ति बताना है। सद्गुरु एक पल में आत्मा को चेतन कर देता है, वो अपनी सुरति में परमात्म-तत्व लाकर शिष्य के भीतर छोड़ता है। यही नाम-दान कहलाता है। इस नाम के बिना कोई भी जीव संसार-सागर से पार नहीं हो सकता।