बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
by सद्गुरु मधु परमहंस जी
Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
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Read in context20 साहिब बन्दगी
(3) साहिब जी को देग़ में डालकर जलाने का प्रयास
बादशाह सिकंदर ने देखा गंगा जी में साहिब को डुबो कर मारने में शेख तकी असफल रहा तो बादशाह ने शेख तकी को कहा कि कबीर तो फकीर है और फकीर अल्लाह का नूर है। यह सुनते ही शेख तकी को क्रोध आ गया और उसको लगा कि कबीर ने कोई जादू किया है और जल को बाँध दिया जिस कारण वो डूब नहीं सका। अब मैं इसे देग़ में डालकर आँच दिलाऊँगा और कबीर की राख बना दूँगा। ऐसा करने से कबीर बच नहीं सकता। यह सोच उसने एक बड़ी देग़ मंगवाई। उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि कबीर को पकड़कर इस देग़ में डाल दो। सैनिकों ने आदेश का पालन करते हुए कबीर को देग़ में डाल दिया। साहिब ने कोई विरोध नहीं जताया और शांत भाव से देग़ में बैठ गए। फिर शेख तकी ने देग़ का मुँह बंद कर दिया और उसके नीचे आग लगा दी। कुछ देर बाद शेख तकी सोचने लगा कि अब कबीर जलकर मर गया होगा। इतने में बादशाह ने शेख तकी को संदेश भेजा कि तुम किसे देग़ में आँच दिला रहे हो, कबीर साहिब तो मेरे पास राजदबार में बैठे हैं! शेख तकी के दुख का कोई ठिकाना न रहा।
देग़ में डाल कबीर को, नीचे आग लगाई।
पीर बड़ा खुश हुआ, देखे सभी लुकाई॥
ले संदेशा राजा का, सैनिक भागा आई।
कबीर तो मेरे पास है, किसे आँच दिलाई॥