बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
by सद्गुरु मधु परमहंस जी
Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
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Read in context24 साहिब बन्दगी
(5) साहिब जी को उबलते तेल में स्नान करने को कहा गया
सबकी जुबान पर साहिब का नाम था शेख तकी साहिब को जल्दी-से-जल्दी मिटाना चाहता था। राजदरबार लगा था। उसने एक बड़ा कड़ाहा मँगवाया और तेल से भरवा दिया। फिर कड़ाहे को भट्टी पर रखकर नीचे आग लगवा दी। जब तेल उबलने लगा तो तकी ने साहिब को कहा कि यदि आप स्वयं खुदा का नूर हैं तो इस तेल से स्नान करके दिखाएँ। तब मैं मानूँगा कि आप सच में खुदा का ही नूर हैं। साहिब बिना अटके उस उबलते तेल के कड़ाहे में उतर गये और स्नान करने लगे। ऐसा लग रहा था कि मानो वे शीतल जल से स्नान कर रहे हैं। तकी साहिब को जादूगर जानकर कहने लगा कि कबीर ने मंत्र द्वारा आग को बाँध दिया है, जिसके कारण उबलता हुआ तेल भी शीतल जल के समान हो गया है। बादशाह सिकंदर ने यह बात सुनी तो उसने सोचा कि मैं परीक्षण करके देखता हूँ। जब उसने अपनी अंगुली कड़ाहे में डाली तो ऊँगली जल गई। वह ज़ोर से चिल्लाता हुआ ज़मीन पर गिर पड़ा। उसकी अँगुली पर, माँस नहीं रह गया था। राजा को मूर्छित देख साहिब उस कड़ाहे से बाहर निकल आए और राजा की जली हुई अँगुली को अपना स्पर्श दिया। साहिब का स्पर्श पाते ही राजा की ऊँगली पुनः पहले की तरह हो गयी और वे उठ खड़े हुए। दूसरी ओर साहिब के शरीर पर कोई निशान तक नहीं था। यह देख शेख तकी और उसके साथी पाखण्डियों को बड़ा ही दुख हुआ और वे लज्जित होकर चले गये। देखने वाले सब साहिब की जय-जयकार करने लगे। आगे के लिए बादशाह ने साहिब से दिल्ली चलने की प्रार्थना की। साहिब जी ने राजा की प्रार्थना को मान लिया। राजा और उसकी सेना साहिब जी को साथ ले दिल्ली की ओर चल पड़े।
तेल भरे कड़ाहे में, साहिब करे स्नान।
तेल ऊबाले मारदा, सब देखत हुये हैरान॥
राजे समझा तेल है ठण्डा, ऊँगुल डुबोई आन।
माँस ऊपर का जल गया, दुःख से लगा चिल्लान॥