बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
by सद्गुरु मधु परमहंस जी
Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
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Read in context26 साहिब बन्दगी
(6) कमाल को जीवित करने के लिए साहिब जी को कहा गया
साहिब को लेकर बादशाह दिल्ली की ओर चलने लगे तो बादशाह ने शेख तकी को समझाया कि साहिब की और कसौटी मत लो। पर शेख तकी कहाँ मानने वाला था। जाते-जाते रास्ते में एक जगह इलाहाबाद में त्रिवेणी के तट पर सब रुक गए। सबने वहाँ स्नान किया और भोजन किया। अब साहिब अपने प्रवचनों से सबको आनन्दित करने लगे। उसी समय संयोग से वहाँ गंगा में बहती हुई एक लाश दिखाई दी।
राजा कहे सुन तकी पीरा, छोड़ गुस्सा अभिमान।
कबीर आप रसूल है, मत करो अपमान॥
ईर्ष्या से भरे शेख तकी ने सोचा कि क्यों न अब साहिब को सबके सामने नीचा दिखाऊँ। तकी ने फौरन राजा से कहा कि यदि कबीर सचमुच खुदा है तो वो इस बहते हुए मुर्दे को जीवित कर दे। तब मैं समझूँगा कि कबीर साक्षात खुदा है। साहिब ने बादशाह से कहा कि आपके यहाँ अनेक पीर, मुल्ला, आदि इस सभा में विराजमान हैं। उन्हें आज्ञा दीजिए कि वे कलमा पढ़कर इस मृतक को जीवित कर दें। राजा के कहने पर सब मिलकर कलमा पढ़ने लगे। सभी मृतक को अपनी ओर बुलाने लगे। पर जब उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली तो सबका मुँह लज्जा से नीचा हो गया। अंत में राजा ने साहिब से बिनती की कि आप ही इस मृतक को अपनी ओर बुलाकर पुनः जीवित करने की कृपा करें। राजा की बिनती स्वीकार कर साहिब ने हाथ ऊपर उठाकर शव को मानो इशारा किया। शव साहिब का इशारा पाते ही किनारे पर आ गया। सबने शव को देखा। वो अत्यंत ही गला-सड़ा हुआ किसी बच्चे का शव था। साहिब ने शव की ओर देख कहा-‘‘उठ, कुदरत के कमाल से’’। वो शव उसी समय उठकर खड़ा हो गया। उसमें प्राणों का संचार हो गया और वो जीवित हो गया। गंगा नदी से बाहर आकर साहिब के चरणों से लिपट गया। यह देख सब हैरान थे। शेख तकी और उसके साथियों के मन ईर्ष्या से जल उठे। राजा के मुँह से निकला-वाह ! आपने तो कमाल ही कर दिया। साहिब ने कहा कि जाओ, आज से इसका नाम ‘कमाल’ ही होगा।