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बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

by सद्गुरु मधु परमहंस जी

Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

Devanagarihipublished122 pages

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30 साहिब बन्दगी

(8) साहिब जी को बन्दूक से मरवाया जाना

पीर शेख तकी को उसके साथियों ने सलाह दी कि कबीर को किसी बंदूकधारी से मरवा देना ही ठीक रहेगा। शेख तकी ने उनकी सलाह को मान लिया और अपने सिपाहियों को भेजकर किसी कुशल निशानेबाज को लाने के लिए कहा जिसका निशाना चूके नहीं। सिपाही तकी की आज्ञा का पालन करते हुए एक बंदूकधारी को ले आए, जो बंदूक चलाने में बड़ा ही माहर था, जिसका निशाना बड़ा ही अचूक था। बंदूकधारी को शेख तकी ने समझा दिया कि उसे कबीर पर बंदूक से गोलियों की बौछार करनी है ताकि कबीर का नामोनिशान मिट जाए। उसने बंदूकधारी से कहा कि यदि तुम इस काम में सफल हुए तो तुम्हें मुँह माँगा ईनाम दिया जायेगा। बंदूकधारी मान गया। मौका आने पर शेख तकी का इशारा पाते ही बंदूकधारी ने साहिब पर उसी समय अंधा-धुंध गोलियों की बौछार शुरू कर दी, जब साहिब प्रवचन कर रहे थे। पर बंदूकधारी की गोलियाँ साहिब के चरणों का स्पर्श पाकर बंदूकधारी के पास वापिस आ रही थीं। यह देख बंदूकधारी बहुत लज्जित हुआ और वहाँ से भाग खड़ा हुआ। पूरी संगत साहिब की जय-जयकार करने लगी।

सत्संग करते साहिब पर हुई गोलियों की बौछार।
गोली चरण स्पर्श कर, वापस हुई बारम्बार॥