बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
by सद्गुरु मधु परमहंस जी
Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
Page 40 of 122
Read in context38 साहिब बन्दगी
(12) साहिब जी को ज़हरीले बिच्छुओं के डंक से मरवाया जाना
पीर शेख तकी को एक दिन एक काज़ी ने सलाह दी कि बहुत सारे ज़हरीले बिच्छुओं को इकट्ठा करके एक साथ कबीर पर छोड़ा जाए। बिच्छुओं के काटने से कबीर की मृत्यु हो जायेगी। शेख तकी को यह बात अच्छी लगी और उसने सोचा इस बार कबीर से छुटकारा मिल जायेगा और बार-बार लज्जित नहीं होना पड़ेगा। सिपाहियों को पहाड़ पर से ज़हरीले बिच्छुओं को पकड़कर लाने का आदेश दिया गया। सिपाहियों ने पहाड़ी पर जाकर कड़ी मेहनत से बहुत सारे बिच्छू इकट्ठा किये और टोकरी में भरकर ले आए। जब बादशाह का दरबार लगा था और साहिब सत्संग की अमृत गंगा बहा रहे थे, तब शेख तकी का आदेश हुआ कि उन बिच्छुओं की टोकरी को साहिब पर डाल दिया जाये। सिपाहियों ने तुरन्त आदेश का पालन करते हुए बिच्छुओं से भरी टोकरी को साहिब पर उलटा कर दिया। पर एक कौतक हुआ कि एक भी बिच्छू साहिब को छू तक नहीं पाया और साहिब तक पहुँचने से पहले ही सब बिच्छू आसमान की तरफ हवा में विलीन हो गये। यह कौतक देख सब भक्तजन साहिब की जय-जयकार करने लगे। दूसरी ओर पाखण्डियों के चेहरे मुरझा गये और मारे लज्जा के वे मुँह नीचा कर चले गए।
जहरीले बिच्छू भर टोकरी, जंगल से ले आए।
भरी टोकरी बिच्छुओं वाली, साहिब पर उलटाएँ॥
साहिब को तो छू न सके, हवा विलीन हो जाये॥