बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
by सद्गुरु मधु परमहंस जी
Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
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Read in context42 साहिब बन्दगी
(14) साहिब जी को जिंदा जलाने की अग्नि परीक्षा ली गयी
हर मुख से साहिब की प्रशंसा सुन-सुन शेख तकी ईर्ष्या की आग में जल रहा था। एक दिन उसने साहिब को जिंदा जलाने का षययंत्र रचा। उसने षडयंत्र के अनुसार एक स्थान पर सूखी लकड़ियों का ढेर लगवा दिया। वहाँ काफी लोग इकट्ठा होना शुरु हो गए। शेख तकी साहिब को अपने साथ लेकर उस स्थान पर आया। शेख तकी ने साहिब को उन लकड़ियों के ढेर के ऊपर बैठने को कहा। साहिब बड़ी ही निडरता से लकड़ियों के ढेर के ऊपर बैठ गये। तब शेख तकी ने अपने सिपाहियों को आज्ञा दी कि लकड़ियों के नीचे आग लगा दो। ढेर के हर तरफ आग लगा दी गयी। आग ने सारी लकड़ियों को जलाकर राख कर डाला, पर साहिब तो शांत होकर बैठे रहे। जब धुँआ उठने लगा और कुछ दिखाई देना संभव न रहा तो शेख तकी को शंका हुई कि कहीं साहिब जादू से राजदरबार में तो नहीं पहुँच गये हैं। उसने अपने एक सिपाही को वहाँ भेजा। सिपाही ने आकर सूचना दी कि वे तो बादशाह सिकंदर के दरबार में सत्य भक्ति का उपदेश दे रहे हैं। यह सुनते ही शेख तकी बड़ा क्रोधित हुआ। उसकी ईर्ष्या और बढ़ गयी। वो तेजी से राजदरबार में आया। साहिब को देख कर बड़ा लज्जित हुआ और वहां से चला गया।
जिंदा पीर कबीर को , चिता पै दिया बिठा।
हुया ईशारा धर्म गुरु का , दी नीचे आग लगा ॥
आग की लपटें उठ रही, देखे सारा जहाँ।
साहिब ज्ञानी पुरुष को , आग न सकी जला ॥