बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
by सद्गुरु मधु परमहंस जी
Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
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Read in context46 साहिब बन्दगी
(16) भूखे शेर को साहिब जी पर छोड़ा गया
नये-नये षड़यंत्र रचते-रचते एक समय शेख तकी के पाखण्डी साथियों ने उसे सलाह दी कि क्यों न इस बार कबीर के ऊपर भूखा शेर छोड़ा जाएँ। भूखा शेर झट से हमला करेगा और भूख का मारा कबीर को खा जायेगा। धर्म गुरु शेख तकी को सलाह बहुत पसंद आई। उसने एक पिंजरे में बंद शेर को मँगवाया और उसे कुछ दिनों तक भूखा रखा। फिर एक दिन समय पाकर उस पिंजरे को अपने सैनिकों की सहायता से उस स्थान पर ले गया, जहाँ पर बैठकर साहिब सत्य भक्ति का उपदेश दे रहे थे। शेख तकी ने साहिब के सामने पिंजरे का मुँह खोला। उसने सोचा कि भूखा शेर सीधा साहिब पर ही हमला कर साहिब को खा जाएगा लेकिन आश्चर्यजनक बात हुई। शेर ने पिंजरे से बाहर निकलकर साहिब के चरणों को स्पर्श किया और वापिस पिंजरे में चला गया। यह देख शेख तकी और उसके पाखण्डी साथी बड़े लज्जित और दुखी हुए और मुँह नीचा करके वहाँ से चले गये। सत्संग सुन रहे श्रद्धालुओं द्वारा साहिब की जय-जयकार से आकाश गूंजने लगा। चारों तरफ साहिब की सत्य भक्ति का गुणगान हो रहा था। साहिब के दर्शन के लिए लोग दूर-दूर से आ रहे थे।
कई दिनों का भूखा शेर, साहिब ऊपर छोड़ा।
चरण स्पर्श पा साहिब का, पिंजरे ओर मुख मोड़ा॥
लज्जित होकर मुँह छुपा के, पीर वहाँ से दौड़ा॥