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बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

by सद्गुरु मधु परमहंस जी

Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

Devanagarihipublished122 pages

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50 साहिब बन्दगी

#(18) ज़हरीले नाग के डंक से साहिब जी को मरवाया जाना

बार-बार मारने के प्रयास करता शेख तकी साहिब का कुछ नहीं बिगाड़ पा रहा था। इस बात से उसकी ईर्ष्या भी बहुत बढ़ गयी थी। एक दिन वो कहीं जा रहा था कि रास्ते में उसे एक सपेरा मिला। सपेरा अपने द्वारा पकड़े हुए साँप लोगों को दिखा रहा था। शेख तकी के मन में एक युक्ति आई और उसने सपेरे को अपने पास बुलाया और कहा ज़हरीले साँप के डंक से कबीर को मारना है। यदि तुम इस काम में कामयाब हो जाओगे तो तुम्हें बहुत सारा ईनाम भी मिलेगा। ईनाम के लालच से सपेरा बड़ा खुश हुआ और जंगल में चला गया। जंगल में बीन बजाते-बजाते सपेरे के जाल में एक ज़हरीला नाग आ गया। उसने उसे पकड़कर पिटारी में बंद कर लिया और शेख तकी के पास लाया। शेख तकी ने सपेरे से कहा कि जब मैं इशारा करूँ, तभी तुम इस ज़हरीले नाग को कबीर के गले में डाल देना। राजा सिकंदर का दरबार लगा हुआ था। तब साहिब सबको उपदेश दे रहे थे। ऐसे समय में शेख तकी ने उस सपेरे को आज्ञा दी। शेख तकी की आज्ञा पाते ही सपेरे ने उस ज़हरीले नाग को साहिब के गले में डाल दिया। तकी साहिब के अंत का इंतज़ार कर रहा था पर हुआ बिलकुल उल्टा। साहिब के गले में पड़ा नाग पुष्पमाला बन गया। यह घटना देख सब साहिब की जय-जयकार करने लगे और पीर शेख तकी लज्जित होकर वहाँ से चला गया।

तकी सोचे कबीर जुलाहा, पड़ा अकल को ताला।
विषधारी फनीयर साँप ले, साहिब ऊपर डाला॥
गले पड़ा फनीयर विषधर, बना फूलों की माला॥

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