बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
by सद्गुरु मधु परमहंस जी
Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
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Read in context52 साहिब बन्दगी
(19) साहिब जी को विष वाले त्रिशूल से मरवाया जाना
क्रोध अथवा ईर्ष्या की आग से जलते हुए एक समय शेख तकी ने विचार किया कि क्यों न कबीर को विष वाले त्रिशूल से मरवा दिया जाए। उसके साथी पंडित, मुल्ला, मौलवी आदि को भी यह योजना बहुत अच्छी लगी। बस, फिर क्या था! तकी ने एक त्रिशूल मँगवाया और उसे विष में बुझाया। उसके बाद एक त्रिशूल चलाने वाले को बुलाकर अच्छी तरह से उसका काम समझाया कि उसे क्या करना है।
मुल्ला मौलवी धर्म गुरु, मिल तरकीब एक बनाई।
करो खातमा पीर कबीर का, त्रिशूल से दियो मरवाई॥
जब साहिब सत्य भक्ति की अमृत वर्षा से भक्तों को प्रसन्न कर रहे थे, तो वहीं उस व्यक्ति ने आकर तकी के इशारे से साहिब पर त्रिशूल के अनेक प्रहार किये। पर त्रिशूल तो साहिब के शरीर तक पहुँच ही नहीं पा रहा था। साहिब तो स्वयं सतपुरुष थे। शरीर तो उन्होंने केवल दुनिया को दिखाने मात्र ही धारण किया था। अगर उनका शरीर मायावी होता तो त्रिशुल चलाने वाले का कोई प्रहार खाली न जाता। इसलिए त्रिशूल चलाने वाला थक-हार गया तो उसने वहाँ से भाग लेना ही उचित समझा। यह देख भक्तजन साहिब की जय-जयकार करने लगे और शेख तकी को फिर लज्जित होना पड़ा और वह शर्मसार होकर वहाँ से चला गया।
साहिब तक न पहुँच सका, कोई त्रिशूल का वार।
यह देख हैरान भक्तजन, करते जय-जयकार॥