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बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

by सद्गुरु मधु परमहंस जी

Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

Devanagarihipublished122 pages

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56 साहिब बन्दगी

(21) साहिब जी को तोप से मरवाने का प्रयास

भोले-भाले लोगों को भरम में डाल समाज को लूट-लूट कर खाने वालों की गिनती बढ़ती जा रही थी। धार्मिक पाखण्डियों के पाखण्डवाद को छोड़ कर आम लोग साहिब की सत्य भक्ति को अपना रहे थे। इसलिए साहिब को अपने रास्ते से हटाने के लिए पाखण्डी रोज-रोज नये-नये षंड्यंत्र रचते जा रहे थे। शेख तकी जितनी साहिब की कसौटियाँ लेता था, उतनी ही साहिब की ख्याति बढ़ती जा रही थी। भक्त लोग पाखण्ड से छूटकर साहिब की शरण में तेजी से आने लगे। ऐसे में एक दिन शेख तकी ने षड्यंत्र रचा कि साहिब को तोप से उड़ा देता हूँ। उसने अपने तोपची से कहा कि तुम तोप में गोला बारूद अच्छी तरह से भरो। तोपची ने आदेश का पालन करते हुए तोप में गोला बारूद भर दिया। अब शेख तकी ने साहिब से कहा कि आप इस तोप के सामने खड़े हो जाओ। साहिब बिना किसी झिझक के तोप के सामने खड़े हो गये। तकी ने फौरन अपने तोपची को तोप चलाने का हुक्म दिया। तोपची तोप चलाता था पर तोप से कुछ नहीं निकलता था क्योंकि तोप में भरे गोला बारूद ने पानी का रूप धारण कर लिया था। इसलिए तोप में भरा पानी आग नहीं पकड़ रहा था। साहिब तोप के सामने खड़े-खड़े मुस्करा रहे थे। अब तकी कुछ-कुछ समझने लगा था कि साहिब साधारण नहीं हैं, फिर भी साहिब की कसनी लेने से नहीं चूकता था।

तोप से उड़ाएँ साहिब को, पीर ने ऐसी युक्ति बनाई।
खड़ा किया तोप के आगे, गोला बारुद को आग लगाई॥
गोला बारुद पानी बन गया, ऐसी साहिब खेल रचाई।
शब्द स्वरूपी देह साहिब की, झूठी दुनिया समझ न पाई॥