BharatKosha
बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

by सद्गुरु मधु परमहंस जी

Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

Devanagarihipublished122 pages

Page 62 of 122

Read in context
Page 62

60 साहिब बन्दगी

(23) बाँस की फूँकनी के प्रहार से साहिब जी को मरवाया जाना

साहिब की सत्य भक्ति पूरे देश में बहुत तेज़ी से फैल रही थी। पाखण्डियों के चुंगल से निकल कर लोग साहिब की सत्य भक्ति को अपना रहे थे। साहिब की बढ़ती हुई शान देख शेख तकी की चिन्ता बढ़ रही थी। इसलिए वो तलाश में रहता कि कैसे साहिब को रास्ते से हटाया जाये। अपने साथी पंडित, मुल्ला और मौलवियों से मिलकर नये-नये षड्यंत्र साहिब को मारने के लिए रचता रहता। एक दिन उसने नगर में बाँस की भारी फूँकनी देखी तो उसके मन में विचार आया कि क्यों न साहिब के सिर पर इस फूँकनी से प्रहार कर साहिब की जीवन लीला को समाप्त किया जाए। यह सोच कर उसने अपने सिपाहियों को भेजकर वो बाँस की फूँकनी मँगवाई और उसने स्वयं ही बाँस की फूँकनी से प्रहार करने का फैसला कर लिया। समय आने पर उसने उस भारी बाँस की फूँकनी से साहिब के सिर पर प्रहार किया। पर साहिब के सिर पर उसका कोई भी असर न हुआ। साहिब के सिर पर बार-बार प्रहार करने से बाँस की फूँकनी का असर न होते देख शेख तकी अत्यंत लज्जित हुआ और शीघ्र ही वहाँ से चल दिया।

देख बाँस की फूँकनी, तकी ने किया विचार।
जिसके सिर पै लगेगी, वोह सह सके न मार॥
अपने हाथों साहिब पर, बहुत किये प्रहार।
बाल बाँका न कर सका, थक कर गया हार॥