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बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

by सद्गुरु मधु परमहंस जी

Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

Devanagarihipublished122 pages

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64 साहिब बन्दगी

(25) साहिब जी को सागवान के पेड़ से बाँध कर मरवाया जाना

आशाओं पर पानी फिर रहा था। शेख तकी बहुत परेशान हो रहा था। साहिब को अपने रास्ते से हटाने के सारे प्रयास असफल हो रहे थे। वो जहाँ भी जाता, उसके कानों में साहिब की प्रशंसा ही सुनाई पड़ती। इससे उसके हृदय की क्रोधाग्नि और बढ़ती जा रही थी। ऐसे में किसी ने उसे बताया कि यदि किसी को सागवान के पेड़ के साथ चाँदी की तारों से बाँध दिया जाए तो उसकी जीवन लीला समाप्त हो जाती है। बौखलाए हुये शेख तकी ने साहिब को मारने का यह षड्यंत्र बिना विचार किये स्वीकार कर लिया। क्योंकि उसका लक्ष्य था कि किसी भी तरह से साहिब को अपने रास्ते से हटाया जाए।

भक्ति साहिब कबीर की, चारों ओर बढ़ती जाये। रोज बड़ाई सुनते सुनते, तकी को नींद न आये॥

उसने सोचा कि ऐसा करके भी देख लेते हैं। शेख तकी साहिब को घुमाने के बहाने साथ ले गया। रास्ते में जहाँ सागवान के पेड़ थे, वहाँ पहुँचकर रुक गया और साहिब को पेड़ के साथ खड़ा होने को कहा। साहिब उसके कहे अनुसार बिना किसी डर के वहाँ खड़े हो गये। शेख तकी ने सिपाहियों को आदेश दिया कि कबीर को चाँदी की तारों के साथ इस पेड़ से बाँध दो। सिपाहियों ने साहिब को पेड़ के साथ बाँध दिया पर सब बेकार ही गया। साहिब का तो कुछ बिगड़ा ही नहीं। तकी मारे लज्जा के मुँह छिपाकर वहाँ से चला गया।

तार चाँदी से बाँध दिया, साहिब पुरुष कबीर। कुछ न बिगड़ा साहिब का, हार गया तकी पीर॥