बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
by सद्गुरु मधु परमहंस जी
Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
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Read in context68 साहिब बन्दगी
(27) साहिब जी को सात खण्डों वाले मकान में तालों से बंद कर मरवाया जाना
एक सहयोगी ने शेख तकी को साहिब के ख़िलाफ़ एक तरकीब बताई कि क्यों न कबीर को अनेक तालों के अंदर बंद कर दिया जाए जिससे कबीर बाहर नहीं आ सकेगा और मारे भूख-प्यास से तड़प-तड़पकर मर जाएगा। शेख तकी इस षडयंत्र से बड़ा खुश हुआ। उसने फौरन सिपाहियों को आदेश दिया कि नगर में कोई ऐसा मकान देखो, जिसमें बहुत सारे खण्ड हों जिनको अलग-अलग ताला लग सके। सिपाहियों को सात खण्डों वाला एक मकान मिल गया और आकर तकी को इस बात की सूचना दी। तकी ने उनके साथ जाकर वो मकान देखा। शेख तकी ने उस मकान के सातवें खण्ड में साहिब के बैठने के लिए एक आसन लगवा दिया और साहिब को उस आसन पर बैठने को कहा। साहिब तो अर्न्तयामी थे पर वे उसके काम में बाधा नहीं पहुँचाते थे। वो जो करता, उसे करने देते। सब कुछ जानते हुए भी साहिब उस आसन पर विराजमान हो गये। साहिब के आसन पर बैठते ही शेख तकी ने सिपाहियों को इशारा कर दिया। सिपाहियों ने बाहर से ताला लगा दिया और फिर एक-एक करके सब खण्डों के द्वार बंद होने लगे और उनमें ताले लगते गए। जब सिपाहियों ने सातवें खण्ड पर भी ताला लगाकर शेख तकी की ओर मुँह किया तो साहिब को वहाँ पर खड़े पाया। यह देख सभी अत्यंत हैरान हुए और शेख तकी को मारे लज्जा के मुँह छुपाए वहाँ से जाना पड़ा।
सात खण्डों में ताले लगाकर, बंद किया साहिब कबीर। तड़प तड़प कर मर जायेगा, खुश हुआ तकी पीर॥ सातवां ताला लगा मुख फेरा, आगे खड़े पुरुष कबीर॥