BharatKosha
बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

by सद्गुरु मधु परमहंस जी

Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

Devanagarihipublished122 pages

Page 72 of 122

Read in context
Page 72

70 साहिब बन्दगी

(28) साहिब जी को नीम के पेड़ के साथ बाँध कर मरवाया जाना

शेख तकी ने मौलवियों और पंडितों की सलाह से साहिब को नीम के पेड़ से बाँध कर मारने का षडयंत्र रच लिया। जब साहिब को नीम के पेड़ के पास ले जाकर पेड़ के साथ खड़े होने को कहा तो साहिब उनकी बात मान पेड़ के साथ खड़े हो गये। शेख तकी साहिब की जहाँ-जहाँ कसनी लेता था, वहाँ-वहाँ बहुत सारे लोग भी साथ ले जाता था, ताकि साहिब की छवि को सबके सामने बिगाड़ सके पर होता उल्टा ही था। साहिब भी लोगों को यह दिखाने के लिए कि ये धार्मिक पाखण्डी लोग हैं, उसकी हर बात को मंजूर कर लेते थे ताकि लोग उनके चुंगल में न फँसें और हो भी यही रहा था। भोली-भाली जनता जो पाखण्डियों के जाल में फँसी थी उनको छोड़ कर धीरे-धीरे साहिब की शरण में आने लगी थी।

जब साहिब नीम के पेड़ के पास खड़े हो गये तो तकी ने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि कबीर को लोहे की तारों के साथ इस पेड़ के साथ बाँध दो। सैनिकों ने हुक्म का पालन किया और साहिब को लोहे की मजबूत तारों से उस पेड़ के साथ बाँध दिया। उसने सोचा कि अब तो कबीर भूख-प्यास के मारे प्राण त्याग देगा पर वो इस सत्य से बेखबर था। साहिब की देही तो केवल देखने के लिए थी। उसका यह प्रयास भी बेकार ही गया। साहिब का वो कुछ नहीं बिगाड़ पाया।

हो इकट्ठे धर्म के अगुवा, तार से बाँधो साहिब कबीर।
भूख प्यास से मर जायेगा, सोची मारन की तरकीब॥
कुछ न बिगड़ा साहिब का, शब्द स्वरुपी साहिब शरीर।
अन्न आहार कुछ न कर्ता, समझ न पाये मूर्ख पीर॥