बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
by सद्गुरु मधु परमहंस जी
Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
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Read in context72 साहिब बन्दगी
(29) साहिब जी को दीवार में चिनवाया गया
साहिब की ख्याति दिनों-दिन बढ़ती देख ईर्ष्या की आग में जलते हुए एक समय मौलवियों और पंडितों ने शेख तकी को सलाह दी कि कबीर को दीवार में चिनवा कर मार देते हैं। तकी पहले से ही किसी योजना की तलाश में था। उसने यह सलाह भी स्वीकार कर ली। धर्म गुरु शेख तकी ने कुशल मिस्त्री और मजदूरों को बुलवाया और उन्हें समझा दिया कि तुम्हें कबीर को दीवार में चिनना है, इसलिए दीवार बड़ी मज़बूत बननी चाहिए। जब दीवार बनाने का सारा मसाला तैयार हो गया तो शेख तकी कबीर साहिब को बुलाकर ले आया और कहा कि आप यहाँ पर खड़े हो जाएँ। मिस्त्री यहां पर दीवार बनायेंगे। कबीर साहिब बिना किसी झिझक के वहाँ खड़े हो गये। मिस्त्रियों ने शीघ्र ही मज़बूत दीवार तैयार कर दी और साहिब को उसमें चिन कर बंद कर दिया। यह देख शेख तकी के साथी बड़े खुश हुए कि अब साहिब से छुटकारा मिल गया। पर कमाल ऐसा हुआ कि अगले ही पल सबने साहिब को दीवार के बाहर खड़े पाया, जिससे सब हैरान हो गए और लज्जित होकर चले गये। यह देख चारों ओर साहिब की जय-जयकार होने लगी।
सभी पाखण्डी हो इकट्ठे, शेख तकी से सलाह बनाई। करो बन्द दीवार के बीच, मुल्ला मौलवी युक्ति बताई॥ साहिब बन्द हुए दीवार में, सबने मिलकर खुशी मनाई। दीवार के बाहर साहिब खड़े, संगत जय-जयकार बुलाई॥