बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
by सद्गुरु मधु परमहंस जी
Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
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Read in context78 साहिब बन्दगी
(32) साहिब जी को जिंदा जलाया जाना
साहिब की बार-बार कसनी लेता हुआ शेख तकी अपनी नाकामयाबी पर घबरा गया था। घबराहट से परेशान होकर वह नित्य नये-नये षड्यंत्र रच रहा था। उसने अपने सभी पाखण्डियों से मिलकर साहिब को जिंदा जलाने की योजना बनाई। किसी ने उसे बताया कि यदि अलसी के तेल में कपड़ा भिगोकर किसी के ऊपर डाल दो और फिर उसमें आग लगा दो तो वो व्यक्ति शीघ्र ही जलकर मर जाता है। तकी को योजना पसंद आई। उसने अलसी का तेल और कुछ कपड़े मँगवाए। फिर शेख तकी ने सिपाहियों से कहा कि इन कपड़ों को तेल में अच्छी तरह से भिगोकर साहिब के शरीर पर बाँध दो। सिपाहियों ने हुक्म का पालन किया। साहिब बड़े शांत भाव से उसकी हरकतें देख मुस्करा रहे थे, उसे कुछ कह नहीं रहे थे, क्योंकि साहिब तो अर्न्तयामी थे।
साहिब के शरीर पर तेल से भीगे कपड़ों को आग लगा दी गयी और सारे कपड़े जलकर राख हो गये। पर साहिब का तो कुछ बिगड़ा ही नहीं। उन्हें तो तनिक भी आँच नहीं आई। शेख तकी और उसके सब साथियों को फिर लज्जित होकर जाना पड़ा।
धर्म के ठेकेदारों मिलके, एक नयी तरकीब बनाई।
तेल से भीगा कपड़ा लिपटा, साहिब को आग लगाई॥
कपड़े जलकर राख हो गए, आग साहिब को छू न पाई।
जीव चेतावन आये साहिब, दुनिया उलटा मारन जाई॥