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बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

by सद्गुरु मधु परमहंस जी

Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

Devanagarihipublished122 pages

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80 साहिब बन्दगी

(33) साहिब जी को काठ की कोठरी में बिठाकर आग लगाई गयी

साहिब की बढ़ती हुई रोज-रोज की ख्याति को देख सभी, शेख तकी और उनके साथी मुल्ला, मौलवियों और पंडितों का हृदय क्रोध की आग से जल रहा था। साहिब को रास्ते से हटाने अथवा मारने के लिए नए-नए षड्यंत्र रचे जा रहे थे। एक दिन शेख तकी के साथी पाखण्डियों द्वारा साहिब को काठ की कोठरी में डाल कर आग लगाने की युक्ति बताई गयी। तकी ने युक्ति को सराहते हुए मान लिया। कुशल मिस्त्रियों को बुलवाकर उसने कहा कि ऐसी लकड़ी की कोठरी तैयार करो, जो जल्दी आग पकड़ सके और अंत तक जले। मिस्त्रियों ने शीघ्र ही ऐसी कोठरी तैयार कर दी। फिर शेख तकी साहिब के पास गया और उन्हें उस कोठरी में बैठने को कहा। साहिब भी बिना किसे रुकावट के उसमें बैठ गये। शेख तकी का आदेश पाते ही सिपाहियों ने कोठरी पर तेल छिड़का और उसमें आग लगा दी। कोठरी तो जलकर राख हो गयी, पर साहिब का कुछ नहीं बिगड़ा। यह देख सब हैरान रह गये। साहिब का आग द्वारा कुछ न बिगाड़ पाने वाली बात जंगल की आग की तरह सारे राज्य में फैल गई और चारों ओर साहिब की जय-जयकार होने लगी।

सभी पाखंडियाँ मिलकर एक, काठ कोठरी तैयार कराई। कबीर गुसाईं बीच बिठाकर, तेल डालकर आग लगाई॥ काठ कोठरी राख बन गई, आग साहिब तक पहुँच न पाई। यह देख सब चकित रह गए, जयकारों की झड़ी लगाई॥