बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
by सद्गुरु मधु परमहंस जी
Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
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Read in context86 साहिब बन्दगी
(36) साहिब जी को तेज़ धार वाले हथियारों से गड़े हुए कुँए में डाला जाना
क्रोध और ईर्ष्या की आग में जलते हुए एक बार शेख तकी ने अपने सहयोगियों, मुल्लाओं, पंडितों आदि से गंभीर परामर्श करके एक और षड्यंत्र रचा। उन्होंने योजना बनाई कि एक गहरा कुँआ खुदवाकर उसमें नोकीले हथियार लगा कर कबीर को कुँए में डाल दिया जाए। शेख तकी ने योजना स्वीकार कर अमल शुरु कर दिया। शेख तकी ने एक गहरा कुँआ खुदवाकर उसमें तेज़ धार वाले हथियारों को इस तरह गड़वा दिया कि उनकी नोक ऊपर की ओर रहे। फिर एक दिन उसने अपने सिपाहियों को आदेश दिया कि कबीर को जंज़ीरों से बाँधकर कुँए के पास ले आओ। वहाँ लाकर धर्म गुरु शेख तकी ने उन्हें आदेश दिया कि कबीर को कुँए में धकेल दो। उन्होंने ऐसा ही किया। शेख तकी को विश्वास था कि उसकी यह युक्ति फेल नहीं होगी और उसे पूर्ण सफलता मिलेगी। जैसे ही जज़ीरों से बाँधे हुए साहिब को उस कुँए में धकेला गया, तकी की खुशी का कोई ठिकाना न रहा। उसने सोचा कि अब हमेशा के लिए साहिब से छुटकारा मिल ही गया। उसके साथी आपस में साहिब के अंत की बातें कर रहे थे कि साहिब कुँए के बाहर हँसते हुए दिखाई पड़े। सबकी आँखें झुक गईं और सिर नीचा कर सब वहाँ से लज्जित होकर चले गए।
पंडित मुल्ला रचे षडयंत्र, कैसे कबीर को मार मुकाएँ।
तेज नोकीले हथियार कुँए के, बीचो बीच गड़वाए॥
हाथ-पाव बाँध साहिब के कुँए में डलवाया।
खुश हुए सब पाखण्डी, अब छुटकारा पाया॥