बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
by सद्गुरु मधु परमहंस जी
Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
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Read in context90 साहिब बन्दगी
(38) बराह के खून को साहिब जी पर डालना
आम समाज को अपने ईशारों पर चलाने वाले मौलवियों, मुल्लाओं, पंडितों आदि की नींद हराम हो गयी थी। उनकी आमदनी बहुत कम हो गयी थी। वो साहिब की बढ़ती शान न सहते हुए साहिब का अंत करना चाहते थे। अंत नहीं कर पाते तो अपमानित करके नीचा दिखाने की सोचते ताकि लोग साहिब के पास न जाएँ और उनकी आमदनी फिर बढ़ने लगे। उन्होंने षड्यंत्र रचा कि भरी सभा में साहिब के सिर पर बराह का खून डाल कर अपमानित किया जाए।
योजना अनुसार शेख तकी ने अपने सैनिकों को एक बराह लाने को कहा। शेख तकी के आदेश का पालन हो गया, बराह लाया गया। शेख तकी ने आज्ञा दी कि इसे मारकर इसका खून एक बर्तन में भर लो। सैनिकों ने आज्ञा का पालन किया। अब तकी ने अपने एक भरोसे वाले साथी को बुलाकर अपनी इस योजना पर आदेशानुसार कार्य करने की बात समझा दी। साहिब तो सब जानते थे। राजदरबार लगा था, ऐसे समय में तकी की आज्ञा पाकर उसके साथी ने खून से भरे हुए उस बर्तन को साहिब पर उडेलना शुरू किया। पर पहले की तरह ही वो खून हवा में उड़ गया और साहिब पर कोई प्रभाव न पड़ा देख कर शेख तकी को फिर से लज्जित होना पड़ा।
नीचा दिखावन हेतु साहिब को, खून बराह का लाए। भरा बर्तन सिर पै डालें, खून ऊपर उड़ जाए॥