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बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

by सद्गुरु मधु परमहंस जी

Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

Devanagarihipublished122 pages

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92 साहिब बन्दगी

(39) साहिब जी पर खूंखार चीतों से वार करवाना

क्रोध और ईर्ष्या से भरे हुए शेख तकी ने एक बार पाखण्डियों के साथ मिलकर विचार किया कि जंगल से खूंखार चीते पकड़ कर मंगवाते हैं और उन्हें कुछ दिन भूखा रखकर कबीर पर छोड़ते हैं। सबने इस योजना को मानते हुए अत्यंत सराहा। योजना के अनुसार कुशल शिकारियों को बुलवाकर तकी ने आदेश दे दिया कि जंगल से सात-आठ जीवित चीते पकड़ कर लाए जाएँ। आदेश पाते ही शिकारी जंगल से सात-आठ चीते पकड़कर ले आए। शेख तकी ने कुछ दिन चीतों को भूखा रखा। साहिब को एक किले में ले जाकर रुकने को कहा। किले की दीवारों के ऊपर देखने वालों की भीड़ लगी हुई थी। किले में पिंजरा ले जाकर पिंजरे का मुख साहिब की ओर खोलने का आदेश दिया। जब चीते छोड़े गये तो उन्होंने साहिब पर वार करने का प्रयास किया पर चीते साहिब तक पहुँच नहीं पा रहे थे। फिर सब चीतों ने साहिब के चरणों को चाटा और वापिस चले गये। यह देख तकी के दुख का कोई पार न रहा और बेइज्जत होकर वहाँ से चला गया।

जंगल में जा व्याघ्र चीते, फड़ पिंजरे में होड़े।
कुछ दिनों तक भूखे रखकर, साहिब ऊपर छोड़े॥
पिजरे का मूँह खुलते ही, साहिब ऊपर झपटे।
जब साहिब तक पहुँच न पाए, सब चरणों में लिपटे॥
चरण चाटकर चले गए, पल भर पास न अटके॥

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