बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
by सद्गुरु मधु परमहंस जी
Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
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Read in context94 साहिब बन्दगी
(40) काठ के कठखोले में साहिब जी को खड़ा कर पैरों पर कीलें ठुकवाना
धर्म गुरु शेख तकी की सभी योजनाएँ फेल हो रही थीं। हर बार जब-जब उसे हार का सामना करना पड़ता, तब उसकी ईर्ष्या और बढ़ती जाती थी। लोग मुल्ला, मौलवियों, पंडितों के चंगुल से बचकर साहिब की सत्य भक्ति में बड़ी तेजी से आने लगे जिस कारण सब साहिब के खिलाफ हो गये थे। पर कुछ धर्मों के अगुवा साहिब को समझकर उनकी शरण में भी आने लग गये थे। दूसरी ओर धर्म गुरु शेख तकी की ईर्ष्या तो और बढ़ती जाती थी। वो आसानी से हार नहीं मानने वाला था। उसने नयी योजना के अनुसार एक काठ का कठखोला बनवाया।
पंडित मुल्ला और मौलवी, मिल शेख को समझाएँ।
कठखोले में साहिब खड़े कर, पाँव में कील ठुकवाए॥
इस योजना के अनुसार कबीर साहिब को काठ के कठखोले में खड़ा करके उनके पैरों पर कीलें ठोंकनी थीं। वज़ीर शेख तकी साहिब के पास गया और उन्हें साथ लेकर वहाँ आया, जहाँ काठ का कठखोला बनाया गया था। शेख तकी ने साहिब को काठ के कठखोले में खड़ा होने का आदेश दिया। शेख तकी के कहने की देरी थी कि साहिब उस कठखोले में खड़े हो गये। तब शेख तकी ने सिपाहियों को आदेश दिया कि साहिब के पैरों पर कीलें ठोंकी जाएँ। सिपाही हाथों में हथोड़े पकड़ कर कीलें ठोंकने लगे। सिपाहियों ने बड़ा प्रयास किया, पर एक भी कील साहिब के पैरों पर नहीं ठोंक सके। अंत में शेख तकी और पंडित, मौलवी लज्जित होकर वहाँ से चले गए।