बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
by सद्गुरु मधु परमहंस जी
Source: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
Page 98 of 122
Read in context96 साहिब बन्दगी
(41) लोहे को गलाकर साहिब जी के ऊपर डलवाना
पाखण्डियों के पाखण्ड से लोगों को सावधान करते हुए साहिब ने कुरीतियों पर प्रहार किया। धार्मिक पाखण्डी साहिब से बहुत परेशान थे। वे सब शेख तकी को साहिब का अंत करने के लिए तरह-तरह के सुझाव देते रहते थे। सब मिलकर साहिब को अपने रास्ते से हटाने की सोच रहे थे। सबने तकी को सुझाव दिया कि क्यों न कबीर के ऊपर गर्म लोहा पिघलाकर डाला जाए। ऐसे में कबीर का जिंदा रहना संभव नहीं होगा। वे पक्का ही मृत्यु को प्राप्त हो जायेगा। इस तरह की हरकतें वह पहले भी कर चुके थे। वो साहिब को जादूगर समझकर विचार करते थे कि हो सकता है कि अब की बार कबीर का जादू न चले और हम साहिब को मारने में सफल हो जाएँ। अब योजना अनुसार लोहे को पिघलाकर पानी की तरह कर दिया गया।
जब राजदरबार में साहिब प्रवचन दे रहे थे, ऐसे में तकी ने अपने सैनिकों को आज्ञा दी कि यह पिघला हुआ लोहा कबीर के ऊपर डाल दो। तकी के हुक्म से पिघले लोहे को सैनिकों ने भरे राजदरबार में साहिब के ऊपर डालना शुरू किया। यह क्या, लोहे का अग्नि तत्व ही समास हो गया और पिघले लोहे की साहिब पर फूलों की तरह वर्षा होने लगी। सब साहिब की जय-जयकार करने लगे। उन्होंने अपनी हरकतों से साहिब के प्रति लोगों की श्रद्धा और बढ़ा दी।
पिघले लोहे का भरा कटोरा, साहिब ऊपर डाला।
पानी की तरह गिरता लोहा, बनी फूलों की माला॥