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भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

by महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास)

DevanagariHindipublished638 pages

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२४ गया है और प्रत्येक भाग के लिए एक-एक चरणाक्षर भी निश्चित किया गया है अस्तु २७ नक्षत्रों के कुल १०८ भाग अर्थात् 'चरण' हुए और एक राशि के अन्तर्गत आये ९ भाग अर्थात् नक्षत्रों के ९ चरण । इस प्रकार सवा दो नक्षत्रों की हुई एक राशि । किस राशि के अन्तर्गत कौन-कौन सा नक्षत्र समाहित है, इसे नक्षत्रों के चरणाक्षरों के आधार पर निम्नानुसार समझ लेना चाहिए—

राशि का नामराशि के चरणाक्षर
१. मेषचूचेचोलालीलूलेलो
२. वृषवावीवूवे
३. मिथुनकाकीकूकेको
४. कर्कहीहूहेहोडाडीडूडे
५. सिंहमामीमूमेमोटाटीटू
६. कन्याटोपापीपूपे
७. तुलारारीरूरेरोतातीतू
८. वृश्चिकतोनानीनूनेनोयायी
९. धनुयेयोभाभीभूधाफाढा
१०. मकरभोजाजीखीखूखेखोगा
११. कुम्भगूगेगोसासीसूसेसो
१२. मीनदीदूदेदोचा
टिप्पणी—'अभिजित्' नक्षत्र के चारों चरणों—जू, जे, जो, खा—की गणना
'मकर' राशि के अन्तर्गत की जाती है।