भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
by महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास)
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Read in context३५७ 'तुला' लग्न की कुण्डली में 'नवमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश तुला लग्न : नवमभाव : बुध नवें भाव में स्वराशि-स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक के भाग्य तथा धर्म की वृद्धि होती है। खर्च अधिक रहता है तथा बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से लाभ होता है। सातवीं मित्रदृष्टि से तृतीयभाव को देखने से भाई-बहिनों का सुख मिलता है तथा कुछ कठिनाइयों के साथ पराक्रम में भी वृद्धि होती है। 'तुला' लग्न की कुण्डली में 'दशमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश तुला लग्न : दशमभाव : बुध दसवें भाव में शत्रु 'चन्द्रमा' की राशि पर स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक को पिता, राज्य तथा व्यवसाय के क्षेत्र में उन्नति करने के लिए कुछ कठिनाइयाँ आती हैं। धर्म का पालन भी कम ही होता है। भाग्योन्नति भी कम होती है। सातवीं मित्रदृष्टि से चतुर्थभाव को देखने से माता, भूमि तथा भवन का पर्याप्त सुख मिलता है जिसके कारण वह धनी समझा जाता है। 'तुला' लग्न की कुण्डली में 'एकादशभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश तुला लग्न : एकादशभाव : बुध ग्यारहवें भाव में मित्र 'सूर्य' की राशि पर स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक को आमदनी यथेष्ट रहती है। वह धर्मात्मा तथा भाग्यवान् होता है। सातवीं मित्र-दृष्टि से पंचमभाव को देखने से सन्तान तथा विद्या-बुद्धि के क्षेत्र में सफलताएँ मिलती हैं। ऐसा व्यक्ति अपनी बुद्धि तथा वाणी के बल पर विशेष उन्नति करता है। परन्तु बुध के व्ययेश होने के कारण हर क्षेत्र में कुछ कठिनाइयाँ भी आती रहती हैं।