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बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

by नरपति नाल्ह

DevanagariHindipublished315 pages

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  • ९९ - तथा कहीं-कहीं 'इयउ' और 'उउ' लगा कर सामान्य भूतकाल के रूप बनाये जाते हैं—रासो में ऐसे अनेक उदाहरण प्राप्त हैं— \phantom{अन्य पु} एक वचन \phantom{रहिउ, आयियउ, रच्यउ, कियउ, खोय} बहु वचन अन्य पुरुष—चालियउ, रहिउ, आयियउ, रच्यउ, कियउ, खोयउ, \phantom{अन्य पुरुष—}हरव्यउ, बोलियउ, भागिणीयउ, दीठउ, \phantom{अन्य पुरुष—}मेल्लउ, पहिल्लउ—इत्यादि \phantom{कियउ, खोयउ,}+ मध्यम पुर ष—कहउ, सुणउ, इत्यादि । \phantom{कियउ, खोयउ,}+ प्रथम पुरुष—छोड़उ, तिजउ, डुबउ, साझोयउ, चूकउ, परिहरयउ, \phantom{प्रथम पुरुष—}इत्यादि । \phantom{रहिउ, आयियउ, रच्यउ, कियउ, खोय}+ रासो में भूतकाल की क्रियाओं के उपर्युक्त रूपों के अतिरिक्त भी जो अन्य रूप प्राप्त हैं उनका उल्लेख नीचे किया जा रहा है— \phantom{अन्य पु} एक वचन \phantom{रहिउ, आयियउ, रच्यउ, कियउ, खोय} बहु वचन अन्य पु०-मिल्ली, दीन, पोन्दा, आया (खड़ी बोली) दिया (खड़ी \phantom{अन्य पु०-}बोली) हुई स्त्री० खड़ीबोली), दिन्ही (स्त्री), रहा (खड़ी \phantom{अन्य पु०-}बोली), गयो, आवीया, छाड्या, कीन, गई (स्त्री० खड़ी \phantom{अन्य पु०-}बोली), गया (पु० खड़ीबोली,)—इत्यादि । \phantom{खो}+ मध्यम पु०—देख्यो, सवाहा (खड़ी बोली) साइया, सिरजी, दिन्ही \phantom{मध्यम पु०—}थी, पहुता—इत्यादि । \phantom{आयियउ, रच्यउ, कि}+ प्रथम पु०—विसारा, करती (स्त्री० खड़ी बोली), बोलइ थी (स्त्री०खड़ी \phantom{प्रथम पु०—}बोली) छडी (स्त्री०) बोलिय्यो, थाकीय, कही (स्त्री० खड़ी \phantom{प्रथम पु०—}बोली), पिछाणीया आदि । भविष्यत् काल भविष्यत् काल के रूप डिंगल में दो तरह से बनाये जाते हैं १—मूल क्रिया के अन्त में 'सी', 'स्यू' तथा 'स्या' लगा कर और २—'ला', 'लो' तथा 'लौ' लगा कर। बीसलदेव रासो में द्वितीय प्रकार से बने भविष्यत् काल की क्रियाओं के रूप का अभाव है । \phantom{अन्य पु} एक वचन \phantom{रहिउ, आयियउ, रच्यउ, कियउ, खोय} बहु वचन अन्य पु०—भाषिसी, मरेसी—इत्यादि । \phantom{रच्यउ, कि}+ मध्यम पु०— \phantom{चालिस} + \phantom{रहिउ, आयियउ, रच्यउ, कि}+ प्रथम पु०—चालिस्यो, आणिस्यां, मिलैस्यो, बोलिस्यां, पधारिस्यो, \phantom{प्रथम पु०—}करैस्यां, आविस्यां, पूछिस्यां, इत्यादि । \phantom{कि}+ 'सो' 'स्यू' तथा स्या' लगा कर बने हुए भविष्यत् काल की क्रियाओं के
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