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बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

by नरपति नाल्ह

DevanagariHindipublished315 pages

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  • १४१ - तठद्द¹ पड़इ दिनावद्द² धीरज राउ। छह कोइ³ अजमेरह जाइ॥ छाप टका देवै⁴ गाडि का⁵। हव वउ⁶ धीरी रिपि दिउ⁷ मनह⁸ सुभाइ॥ दिन⁹ बहु¹⁰ नह¹¹ म्है आविस्या। सत्रवंसी राय नह कहिज्यो जाइ॥१२०७॥ तठद्द¹² जोगिनउ¹³ एक अपूरव राउ। जदूं¹⁴ मन¹⁵ दरह तो¹⁶ सांभरि जाइ॥ चखत खपल सुचाजण्ड¹⁷। थे तट पूछउ जोगी नह बोलायद्द राइ॥ १. ग्रा० १२ तठै। २. ग्रा० १० दिवाईयो। ३. ग्रा० ६ कोइ आन, ग्रा० १२ कोई आन। ४. ग्रा० ६ ढुंगा, ग्रा० १२ यउ। ५. ग्रा० १२ रोकडा। ६. ग्रा० १२ (में नहा है)। ७. ग्रा० १२ दीयउ। ८. ग्रा० १२ (में नहीं है)। ९+१०+११ ग्रा० ६ दिन चिहु मै, ग्रा० १० चिहे दिन नै। यह छंद ग्रा० ६ में २०६ तथा ग्रा० १० में २०७ है। १२+१३. ग्रा० ६ अठै जोगनो, ग्रा० ६, अ० २ जोगी एक, ग्रा० १२ तठैजोगनउ। १४. अ० २, ग्रा० ६ (में नहा है) ग्रा० १० जउ। १५. ग्रा० ६ मन रीं, १६. ग्रा० १२ तउ। १७. अ० २ अरि चाराण्ड, ग्रा० ६ चालणौ, ग्रा० ६ सुचाचलो, ग्रा० १० सो चालणौ।