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बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

by नरपति नाल्ह

DevanagariHindipublished315 pages

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  • १६० - रुदार नखरा महीपा¹। हाल रही भय बोलह² बोथ॥ बीसल देव परं चापीपा³। पाजा हो चापीपा⁴ जाणीय बोथ⁵॥ आनंद⁶ पयाण दखदा। जंगमं भाट करह⁷ सद्दं संप्राज॥ पात्र गंभार नृपस वरदत्र⁹। सपि जयड परि¹⁰ चापीयउ बीसल चहुवान¹¹॥२३३॥ दीटकठ¹² टन्नट¹³ धुता कठ पाठ। ठम्मकी टम्मकी¹⁴ मेलइण्डइ पाउ¹⁵॥ १. आ० १२ महीपा। २. आ० १२ बोलीपा। ३. आ० ६ क्राईक, आ० १२ आपीपो। ४. आ० १२ पवै। ५. आ० ६ पाश्रिया टोल । ६. आ० १२ आयंद। ७. आ० १२ तिहा करह। ८. आ० १२ (में नहीं है)। ९. आ० १२ गूभर नस्यो। १०. आ० १२ श्रो परि। ११. आ० १२ राय चौहाण। यह छंद आ० ६ में २३५ तथा आ० १२ में २८६ है। १२. अ० २ चौया को, आ० १२ फोट कोड। १३. अ० २ हँहँगो। १४. आ० १२ ठभिक ठभिक। १५. अ० २ देखइ पाव, आ० ६ मेलदइ पाउ, आ० १२ धण मेलई पाठ।