बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)
Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans
by नरपति नाल्ह
DevanagariHindipublished315 pages
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- १६६ - कनक काया मिली¹ कूं कूं रोल²। कठिन पयोधर रतन³ कचोल॥ केलि गरभ जिसी कूं पली⁴। घीलइ⁵ घण जब पीचइ नीक⁶॥ मोडिकवि चालइ⁷ गोरडी। उण की विरह वेदना⁸ ना सहइ कोइ॥ मिउं राजा राखी⁹ मिया¹⁰। रयण¹¹ नाहल कहइ¹² मिलिओ सहु कोइ¹³॥२४६॥ १. अ० २ घट। २. अ० २, आ० ६ कूं कूं लोल, आ० ६ कूं को रोल। ३. आ० १३ हेम। ४. आ० ६ कूं पली, आ० १२ रूप की आगली। ५. आ० १२ घील। ६. आ० १२ जब घण मोडै नाक। ७. आ० ६ फा चालउ, आ० १२ कडिमौडै चालै। ८. आ० ६ वेदन। ९. अ० २, आ० ६ राणीसु। १०. अ० २, आ० ६ मिलियो। ११. अ० २ म, आ० ६ (में नहीं है) आ० ६ द्यु, आ० १२ सु। १२. अ० २, आ० ६ इणी कवि, आ० ६ नल्ह कहै, आ० नाहल कहै। १३. अ० २, आ० ६ सन कोइ। यह छं० अ० २ पाट ३ में १०१, आ० ६ खड ३ में ६६, आ० ६ में २४८ तथा आ० १२ में २४२ है। ॥ समाप्त ॥