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वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Vedanta Darshana: Brahma Sutra with Shankara Bhashya

by भगवान् बादरायण व्यास व आदि शङ्कराचार्य

Source: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (origin)

DevanagariSanskritpublished486 pages

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( १५ ) सूत्र विषय पृष्ठ १४-१६ ज्योतिः आदि तत्त्वोंका अधिष्ठाता ब्रह्म और शरीरका अधिष्ठाता नित्य जीवात्मा है, इसका कथन ............. २५६-२५८ १७-१९ इन्द्रियोंसे मुख्य प्राणकी भिन्नता .............................. २५८-२५९ २० ब्रह्मसे ही नाम-रूपकी रचनाका कथन .................... २६० २१-२२ सब तत्त्वोंका मिश्रण होनेपर भी पृथिवी आदिकी अधिकतासे उनसे पृथक्-पृथक् कार्यका निर्देश ........... २६०-२६१ तीसरा अध्याय पहला पाद १-६ शरीरके बीजभूत सूक्ष्म तत्त्वोंसहित जीवके देहान्तरमें गमनका कथन, 'पाँचवीं आहुतिमें जल पुरुषरूप हो जाता है' श्रुतिके इस वचनपर विचार, उस जलमें सभी तत्त्वोंके सम्मिश्रणका कथन और अन्यान्य विरोधोंका परिहार .... २६२-२६८ ७-११ स्वर्गमें गये हुए पुरुषको देवताओंका अन्न बताना औपचारिक है, जीव स्वर्गसे कर्मसंस्कारोंको साथ लेकर लौटता है, श्रुतिमें 'चरण' शब्द कर्मसंस्कारोंका उपलक्षण और पाप-पुण्यका बोधक है, इसका उपपादन........... २६८-२७२ १२-१७ पापी जीव यमराजकी आज्ञासे नरकमें यातना भोगते हैं, स्वर्गमें नहीं जाते, कौषीतकिश्रुतिमें भी समस्त शुभकर्मियोंके लिये ही स्वर्गगमनकी बात आयी है; इसका वर्णन .... २७२-२७५ १८-२१ यम-यातना छान्दोग्यवर्णित तीसरी गतिसे भिन्न एवं अधम चौथी गति है, इसका वर्णन तथा स्वेदज जीवोंका उद्भिज्जमें अन्तर्भाव ........................................ २७६-२७८ २२-२७ स्वर्गसे लौटे हुए जीव किस प्रकार आकाश, वायु, धूम, मेघ, धान, जौ आदिमें स्थित होते हुए क्रमशः गर्भमें आते हैं, इसका स्पष्ट वर्णन ................................... २७८-२८१ दूसरा पाद १-६ स्वप्न मायामात्र और शुभाशुभका सूचक है, भगवान् ही