BharatKosha
वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Vedanta Darshana: Brahma Sutra with Shankara Bhashya

by भगवान् बादरायण व्यास व आदि शङ्कराचार्य

Source: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (origin)

DevanagariSanskritpublished486 pages

Page 342 of 486

Read in context
Page 342

सूत्र २९ ] अध्याय ३ ३३९ स्थिति होनेमें; अविरोधात्=कोई विरोध नहीं है (इसलिये ब्रह्मलोकमें जानेका विधान है)। व्याख्या- छान्दोग्योपनिषद् (३।१४।१)-में कहा है कि 'अथ खलु क्रतुमयः पुरुषो यथाक्रतुरस्मँल्लोके पुरुषो भवति तथेतः प्रेत्य भवति ॥' अर्थात् 'यह पुरुष निश्चय ही संकल्पमय है। इस लोकमें पुरुष जैसे संकल्पवाला होता है, वैसा ही देहत्यागके पश्चात् यहाँसे परलोकमें जानेपर भी होता है।' इससे यह सिद्ध होता है कि जो ज्ञानी पुरुष किसी लोकमें जानेकी इच्छा न करके यहीं मुक्त होनेका संकल्प रखता है, ब्रह्मज्ञानके लिये साधनमें प्रवृत्त होते समय भी जिसकी ऐसी ही भावना रही है, वह तो तत्काल यहीं ब्रह्म- सायुज्यको प्राप्त हो जाता है; परंतु जो ब्रह्मलोकके दर्शनकी इच्छा रखकर साधनमें प्रवृत्त हुआ था तथा जिसका वहाँ जानेका संकल्प है, वह देवयान- मार्गसे वहाँ जाकर ही ब्रह्मको प्राप्त होता है। इस प्रकार साधकके संकल्पानुसार दोनों प्रकारकी गति मान लेनेमें कोई विरोध नहीं है। सम्बन्ध - यदि इस प्रकार ब्रह्मलोकमें गये बिना यहाँ ही परमात्माको प्राप्त हो जाना मान लिया जाय तो क्या आपत्ति है? इसपर कहते हैं- गतेरर्थवत्त्वमुभयथान्यथा हि विरोधः ॥ ३।३।२९॥ गतेः=गतिबोधक श्रुतिकी; अर्थवत्त्वम्=सार्थकता; उभयथा=दोनों प्रकारसे ब्रह्मकी प्राप्ति माननेपर ही होगी; हि=क्योंकि; अन्यथा=यदि अन्य प्रकारसे माने तो; विरोधः=श्रुतिमें परस्पर विरोध आयेगा। व्याख्या-श्रुतियोंमें कहीं तो तत्काल ही ब्रह्मकी प्राप्ति बतलायी है। (क० उ० २।३।१४, १५), कहीं ब्रह्मलोकमें जानेपर बतायी है (मु० उ० ३।२।६) अतः यदि उपर्युक्त दोनों प्रकारसे उसकी व्यवस्था नहीं मानी जायगी तो दोनों प्रकारका वर्णन करनेवाली श्रुतियोंमें विरोध आयेगा। इसलिये यही मानना ठीक है कि साधकके संकल्पानुसार दोनों प्रकारसे ही परमात्माकी प्राप्ति हो सकती है। ऐसा माननेपर ही देवयानमार्गसे गतिका वर्णन करनेवाली श्रुतिकी सार्थकता होगी और श्रुतियोंका परस्पर विरोध भी दूर हो जायगा।