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बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya

by आदि शङ्कराचार्य

Source: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (origin)

DevanagariSanskritpublished1,402 pages

Page 67 of 1402

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Page 67

ब्राह्मण २] शाङ्करभाष्यार्थ ६१


संस्कृत मूलहिन्दी भाष्यार्थ
योश्च प्रत्ययोर्वर्तमानघटप्रत्यय-<br>वन्न निर्विषयत्वं युक्तम्; अनाग-<br>तार्थिप्रवृत्तेश्च । न ह्यसत्यर्थितया<br>प्रवृत्तिर्लोके दृष्टा । योगिनां चाती-<br>तानागतज्ञानस्य सत्यत्वात् ।<br>असंश्चेद्भविष्यद्घट ईश्वरस्य भविष्य-<br>द्घटविषयं प्रत्यक्षज्ञानं मिथ्या<br>स्यात् न च प्रत्यक्षमुपचर्यते ।<br>घटसद्भावे ह्यनुमानमवोचाम ।<br>विप्रतिषेधाच्च । यदि घटो भवि-<br>ष्यतीति कुलालादिषु व्याप्रिय-<br>माणेषु घटार्थं प्रमाणेन निश्चितं<br>येन च कालेन घटस्य सम्बन्धो<br>भविष्यतीत्युच्यते,तस्मिन्नेव काले<br>घटोऽसन्निति विप्रतिषिद्धमभि-<br>धीयते । भविष्यन्घटोऽसन्निति,<br>न भविष्यतीत्यर्थः । अयं घटो न<br>वर्तत इति यद्वत् ।प्रत्ययोंका भी वर्तमान घटप्रत्ययके समान विषयशून्य होना उचित नहीं है, क्योंकि भविष्यद् घटकी इच्छावाले पुरुषकी प्रवृत्ति देखी जाती है । असत्पदार्थकी इच्छासे लोकमें किसीकी प्रवृत्ति नहीं देखी जाती । इसके सिवा योगियोंका भूत और भविष्यत्सम्बन्धी ज्ञान तो सत्य ही होता है । यदि भावी घट असत् माना जाय तो ईश्वरका भावी घटसम्बन्धी प्रत्यक्ष ज्ञान भी मिथ्या होगा; किंतु प्रत्यक्ष ज्ञान मिथ्या नहीं हो सकता ।<br><br>इसके सिवा घटकी सत्तामें हमने अनुमानप्रमाण भी दिया है । तथा उसकी सत्ता न माननेसे विरोध भी आता है । यदि घटके लिये प्रवृत्त हुए कुम्हार आदिको प्रमाणसे यह निश्चय हो गया है कि घट होगा तो जिस कालसे 'घटका सम्बन्ध होगा' ऐसा कहा जाता है उसी कालमें 'घट नहीं है' ऐसा कथन तो विपरीत ही है । 'भविष्यद् घट असत् है' इसका अर्थ तो यही है कि 'घट उत्पन्न नहीं होगा' जैसे कहा जाय कि 'यह घट विद्यमान नहीं है।'
अथ प्रागुत्पत्तेर्घटोऽसन्नित्यु-<br>च्येत, घटार्थं प्रवृत्तेषु कुलालादिषुऔर यदि यह कहा जाय कि उत्पत्तिसे पूर्व घट असत् है, और इस 'असत्' शब्दका यह अर्थ हो