चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)
Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation
by महर्षि चरक व दृढ़बल
Source: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (origin)
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Read in context१०८ चरकसंहिता [अ० ८
में गर्भ गिर जाता है। बहुत अधिक हिलने डुलनेवाली सवारी पर चलने से, अप्रिय बातों के बहुत सुनने से, निरन्तर उत्तान (चित) सोने से, गर्भ की नाभि में लगी नाड़ी गर्भ के गले में लिपट जाती है। खुले स्थान में, मैदान में सोनेवाली या रात में घूमनेवाली स्त्री के नित्य पागल संतान उत्पन्न होती है, झगड़ालु स्त्री अपस्मार रोगवाली संतान उत्पन्न करती है। मैथुनशील स्त्री बुरे शरीर वाले, निर्लज्ज या स्त्री-प्रकृति के संतान को उत्पन्न करती है। नित्य शोका- तुर रहनेवाली स्त्री भीत, निर्बल अथवा थोड़ी उमरवाले संतान को जन्म देती है, मन से द्रोह करनेवाली, दूसरे को पीड़ित करनेवाले, ईर्ष्यालु या स्त्री-प्रकृति के संतान को जन्माती है, चोरी के स्वभाववाली स्त्री बहुत मेहनत करनेवाले, अतिद्रोही अथवा कर्म न करनेवाले संतान को पैदा करती है। क्रोधशील स्त्री चण्ड, शठ या निन्दा करने वाले संतान को उत्पन्न करती है। नित्य सोने वाली माता आलसी, मूढ अथवा मन्दाग्नि संतान को उत्पन्न करती है। मद्यपान करने वाली स्त्री पिपासा वाले, थोड़ी स्मृति और चंचल मन वाले संतान को उत्पन्न करती है ऴ। गोधा (गोह) के मांस को खाने वाली स्त्री शर्करामोही, पथरी के रोगी या शनै.मेही को जन्म देती है, सूअर के मांस में रुचि करने वाली स्त्री लाल आंखों वाले वा अकस्मात् जिसका श्वास बन्द हो जाये, ऐसे, कठोर बालों वाले संतान को जन्म देती है। मछलियों के मांस में रुचि करने वाली स्त्री देर में पलक गिराने वाले, अथवा बे झपक आंख वाले संतान को पैदा करती है। मधुर रस (दूध को छोड़कर शेष मधुर) को खाने वाली स्त्री प्रमेही, गूंगी या बहुत मोटे संतान को जन्म देती है। अम्ल रस का सेवन करने वाली रक्तपित्त के रोगी वा त्वचा और आंख के रोगी को जन्म देती है। लवण रस को सेवन करने वाली स्त्री शीघ्र वलि (झुरिया) या पलित (सफेद बाल वाले) तथा गंजे संतान को जन्म देती है। कटु रस को सेवन करने वाली स्त्री दुर्बल अल्पशुक्रवाली या संतान रहित संतति को उत्पन्न करती है। तिक्त रस को सेवन करने वाली स्त्री शोषरोगी, निर्बल या छोटी संतति को उत्पन्न करती है। कषाय रस को सेवन करने वाली स्त्री श्याव (काले) आनाह वा उदावर्त्त रोगी
ऴ रौटेण्डा अस्पताल में एक नव जात बच्चा लगातार चार पाच दिन तक रोता रहा। इसको चुप कराने क लिये सब उपायें किये गये। प्यास के लिये पानी भी दिया, दूध भी दिया, पर चुप न हुआ। अन्त मे मद्य देन पर ही चुप हुआ। इस कारण को ढूढने पर पता चला कि इसकी माता शराब पीती थी।