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चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation

by महर्षि चरक व दृढ़बल

Source: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (origin)

DevanagariSanskritpublished616 pages

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१८६ चरकसंहिता [ अ० १२ अवस्था का श्रवण करना अथवा रोगी का वर्णन करते समय भूतकाल की क्रियाओं को सुनना अशुभ लक्षण हैं । ऐसा सुन कर रोगी की मृत्यु समझनी चाहिये । इस प्रकार से मरणोन्मुख रोगियों के दूतों का वर्णन सम्पूर्ण रूप में कह दिया ॥ २४ ॥ पध्याातुरकुलानां च वक्ष्याम्यौत्पातिकं पुनः ॥ २५ ॥ अवश्रुतमधोत्कृष्टं स्खलनं पतनं तथा। आक्रोशः संप्रहारो वा प्रतिषेधो विगर्हणम् ॥ २६ ॥ वस्त्रोष्णीषोत्तरीयध्वजच्छत्रोपानद्युगाश्रयम् । व्यसनं दर्शनं चापि मृतव्यसनिनां तथा ॥ २७ ॥ चैत्यध्वजपताकानां पूर्णानां पतनानि च । हतानिष्टप्रवादाश्च दर्शनं भस्मपांसुभिः ॥ २८ ॥ पथच्छेदो विडालेन शना सर्पेण वा पुनः । मृगद्विजानां क्रूराणां गिरो दीप्तां दिशं प्रति ॥ २९ ॥ शयनासनयानानामुत्तानानां प्रदर्शनम् । इत्येतान्यप्रशस्तानि सर्वाण्याहुर्मनीषिणः ॥ ३० ॥ एतानि पथि वैद्येन पश्यताऽऽतुरवेश्मनि । शृण्वता च न गन्तव्यं तदागारं विपश्चिता ॥ ३१ ॥ इत्यौत्पातिकमाख्यातं पथि वैद्यविगर्हितम् । ( ५ ) मार्ग के लक्षण— रोगी के घर जाते समय रास्ते में जो अरिष्ट सूचक लक्षण ( अशुभ चिह्न ) होते हैं उनको कहते हैं—छींक का आना, डर कर रोना, फिसलना, गिरना, चिल्लाना, चोट लगना, प्रतिषेध ( मत जाओ ऐसी रुकावट होना ), निन्दा, वस्त्र, पगड़ी, चादर ( दुपट्टा ), छत्री, जूता इन पदार्थों का फट जाना, मार्ग में दुःखी अथवा मृत या कान, नाक अथवा अंग से हीन व्यक्ति का दर्शन होना, चैत्य (मन्दिर), ध्वजा, पताका अथवा पानी से भरे घड़ों का गिरना; मरना या कोई अनिष्ट बात, या वस्तु का नाश सुनाई देना; राख या रेत-मिट्टी इन सहित दीखना; बिल्ली, सांप या कुत्ता इनका रास्ता काट कर जाना; जिस दिशामें सूर्य हो उधर ही शृगाल, गोहड़, गीध आदि क्रूर पशु पक्षी चिल्ला रहे हों; बिछौना, आसन, गाड़ी आदि वस्तुएं उत्तान रूप से रास्ते में पड़ी हों तो बुद्धिमान् इनको अशुभ लक्षण समझें । ۞ रोगी के घर में जाते समय ये लक्षण हों तो रोगी के घर नहीं जाना चाहिये । वैद्य के लिए निन्दित इन 'औत्पातिक' लक्षणों को कह दिया ॥२५-३१॥ ۞ दीप्ता दिक्—'दक्षिण दिशा' भी अर्थ है ।

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